
१. तिथि
यह विधि कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक किसी भी दिन करते हैं ।
२. पूजन
श्रीविष्णु (बालकृष्ण की मूर्ति) का तुलसी से विवाह कराने की यह विधि है । इस हेतु, विवाह के पहले दिन तुलसी-वृन्दावन को रंगकर सुशोभित करते हैं । वृन्दावन में गन्ना, गेंदे के पुष्प डालते हैं एवं जड के पास इमली व आंवला रखते हैं । यह विवाह समारोह संध्या के समय करते हैं । (तुलसी की अधिक जानकारी सनातन के ग्रन्थ ‘श्रीविष्णु, श्रीराम व श्रीकृष्ण’ में पढें ।)
३. विशेषताएं
कार्तिक शुक्ल द्वादशी पर तुलसी विवाह उपरान्त चातुर्मास में रखे गए सर्व व्रतों का उद्यापन करते हैं । जो पदार्थ वर्जित किए हों, वह ब्राह्मण को दान कर, फिर स्वयं सेवन करें ।
(संदर्भ : सनातन का ग्रंथ – ‘त्योहार मनानेकी उचित पद्धतियां एवं अध्यात्मशास्त्र’)
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सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !