
नई देहली – केंद्र सरकार के विधि आयोग ने भारत में समान नागरिक संहिता बनाने पर निर्देश मांगे हैं । उसे बहुत अच्छा प्रतिसाद प्राप्त हुआ है । ऐसा कहा जाता है कि ६० लाख से अधिक लोगों ने अपना प्रतिसाद भेजा है । मुस्लिम संगठन इस कानून का विरोध कर रहे हैं । इस पृष्ठभूमि में देखने में आया है कि अनेक स्थानों में मस्जिद के बाहर एक विशेष ‘बार कोड’ वाला फलक लगाया गया है, जिसमें विधि आयोग से विरोध प्रविष्ट करने का आवाहन किया गया है । उत्तर प्रदेश के बरेली समेत मुंबई जैसे महानगरों में भी ऐसा देखा गया ।
UCC के खिलाफ मस्जिदों के बाहर लगे Bar Code, स्कैन करो-विरोध दर्ज कराओ: AIMPLB ने धमकी देकर कहा- कभी लागू नहीं होने देंगे समान नागरिक संहिता#UCC #up #masjidhttps://t.co/KUaLgwq2eS
— ऑपइंडिया (@OpIndia_in) July 15, 2023
१. बरेली में जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के कार्यकर्ताओं ने एक मस्जिद के बाहर यह ‘बार कोड’ लगाया है । मस्जिद में नमाज पढने आने वाले मुसलमान मोबाइल फोन के माध्यम से ‘बार कोड’ स्कैन करके विरोध का संदेश भेज रहे हैं । यहां के मुस्लिम समाज का कहना है कि समान नागरिक कानून शरिया कानून के विरुद्ध है इसलिए मुस्लिम समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा । स्वतंत्रता के उपरांत मुस्लिम समाज को कुछ अधिकार मिले हैं । हम इसका पालन कर रहे हैं ।
२. विरोध के संदेश भेजने के लिए मुंबई के मलाड में पठानवाडी में नूरानी मस्जिद के बाहर बार कोड भी लगाए जा रहे हैं । इसकी जानकारी मिलने के उपरांत स्थानीय पुलिस ने मस्जिद के मैनेजर को जांच के लिए बुलाया । यहां के पूर्व पार्षद अहमद जमाल ने कहा कि मुस्लिम समाज समान नागरिक कानून को स्वीकार नहीं करता है ।
संपादकीय भूमिकासमान नागरिक कानून के समर्थन में कितने हिन्दू एवं उनके संगठन क्या ऐसे प्रयास कर रहे हैं ? |
हमारे पास लाठीमार के लघु चलचित्र देखने का समय नहीं है !
संसद में विपक्ष का हंगामा : दोनों सदनों की कार्यवाही कुछ घंटों के लिए स्थगित
श्री राम मन्दिर में दान की चोरी होना समाज के नैतिक पतन की पराकाष्ठा – न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन, इलाहाबाद उच्च न्यायालय
Hindustan Unilever Compensation : ‘हिन्दुस्तान युनिलिवर लिमिटेड’ प्रतिष्ठान को ग्राहक को क्षतिपूर्ति के रूप में ५० सहस्र रुपए देने का आदेश ।
Cockroach Party Sets Condition : बातचीत के लिए जंतर मंतर पर आईए अथवा किसी सार्वजनिक स्थान पर बैठक लीजिए ।
MSRTC Cleanliness Drive : स्वच्छता के लिए जनता से करोडों रुपये लेने के उपरांत भी बस डिपो की दुर्दशा यथावत !