
नई देहली – सर्वोच्च न्यायालय ने २७ वर्षों पूर्व के एक हत्या प्रकरण में पिता एवं पुत्र को निर्दोष घोषित किया । इससे पूर्व सत्र न्यायालय एवं उच्च न्यायालय ने उन्हें दोषी बताते हुए उम्रकैद का दंड सुनाया था । सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इन दोनों को वादी (फिर्यादी) पक्ष द्वारा उन पर आरोप स्पष्ट न कर पाने से एवं संशय (benefit of doubt) के लाभ के कारण निर्दोष मुक्त कर दिया ।
उत्तरप्रदेश के एक गांव में अल्ताफ हुसेन की भूमि पर मुहम्मद मुस्लिम एवं शमशाद से वाद-विवाद था । वर्ष १९९५ में एक दिन अल्ताफ हुसेन अपने बेटे एवं भतीजे के साथ साइकल से जा रहा था, तब मुहम्मद मुस्लिम एवं शमशाद ने हुसेन की कुल्हाडी से वार कर हत्या कर दी । इस प्रकरण में सत्र न्यायालय ने उन दाेनों को दोषी बताते हुए उम्र कैद सुनाई और उसे उच्च न्यायालय ने भी कायम रखी थी ।
सुप्रीम कोर्ट ने 27 साल पुराने हत्या मामले में पिता-पुत्र को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया #SupremeCourt #MurderCase https://t.co/aciDfCAv8t
— Live Law Hindi (@LivelawH) June 23, 2023
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि मृत हुसेन के पुत्र और भतीजे ने हुसेन को बचाने का कोई भी प्रयत्न नहीं किया अथवा आक्रमण में घायल होने के पश्चात उसे अस्पताल भी नहीं ले गए । इससे संशय निर्माण होता है । पुलिस ने साइकल एवं आरोपियों की कथित ब्लैंकेट न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया । अन्य छोटी-छोटी बातों में भी संदिग्धता होने से उसका लाभ आरोपियों को देते हुए उन्हें निर्दोष बताया जा रहा है ।
संपादकीय भूमिका
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