
रामनाथी, २१ जून (संवाददाता) – इस भारतभूमि की रक्षा के लिए करोडों हिन्दुओं ने प्राणों का बलिदान दिया है । ऐसा होते हुए हम इस भूमि के टुकडे अन्य धर्मियों को कैसे लेने दे सकते हैं ? हमारे महान ऋषि-मुनियों ने मनुष्य के हित के लिए भारतीय परंपराएं एवं संस्कृति बनाई हैं । सवेरे जागने के उपरांत सर्वप्रथम भूमि को प्रणाम करना, सूर्यदेव को प्रणाम करना आदि हिन्दुओं की संस्कृति है । भगवान को समर्पित करने के लिए फूल तोडने से पूर्व उस पेड से अनुमति लेना हिन्दू धर्म की सीख है । ऐसी संस्कृति में पर्यावरण का विनाश कैसे हो सकेगा ? भारतीय संस्कृति मूलतः पर्यावरण के संवर्धन की शिक्षा देती है ।

वर्ष २०२१-२२ में भारत से ११ लाख ७५ सहस्र मेट्रीक टन ‘बीफ’ (गोमांस) का निर्यात हुआ । यह बात हमारे धर्म एवं शास्त्र के विरुद्ध है । हमारी संस्कृति में गाय को चारा देने के लिए कहा गया है । हमारे अभिभावकों ने अपने बच्चों को गाय को चारा देना सिखाया होता, तो हिन्दू युवतियां गाय को काटनेवालों के साथ भाग नहीं जातीं । हिन्दुओं ने अपने बच्चों को अपनी संस्कृति सिखाई होती, तो लव जिहाद की घटनाएं नहीं होतीं । हिन्दुओं को अपने बच्चों को अपनी भारतीय संस्कृति सिखानी चाहिए, ऐसा स्पष्टतापूर्ण प्रतिपादन मुंबई के ‘अयोध्या फाऊंडेशन’ की संस्थापिता श्रीमती मीनाक्षी शरण ने किया । वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव के पांचवें दिन (२०.६.२०२३ को) उपस्थित हिन्दुत्वनिष्ठों को संबोधित करते हुए वे ऐसा बोल रही थीं ।
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