
केश नियमित या स्वच्छ न धोने से केश की अनेक समस्याएं उत्पन्न होती हैं । इसलिए केश की देखभाल करने के अंतर्गत केश धोने का अधिक महत्त्व है । पुरुषों को प्रतिदिन, तथा स्त्रियों को सप्ताह में न्यूनतम दो बार केश धोने चाहिए । केश की गुणवत्ता और आरोग्य केवल केश धोने पर ही अवलंबित नहीं होता, अपितु इसे किस पदार्थ से धोते हैं, इसपर भी अवलंबित होता है ।
पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिन केश क्यों नहीं धोने चाहिए ?
पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिन रज-तम प्रभारित वायुमंडल में केश धोने से केश द्वारा कष्टदायक तरंगें ग्रहण होने की संभावना : ‘पूर्णिमा और अमावस्या के दिन केश धोने से पानी के संपर्क के कारण केश में आपतत्त्व की मात्रा बढकर केशवाहिकाएं अधिक संवेदनशील बनती हैं और वायुमंडल में सतत भ्रमण करनेवाली कष्टदायक तरंगों से तुरंत प्रभावित होती हैं । मुक्त केश की हलचल से केश की रिक्तियों में तप्त घर्षणयुक्त ऊर्जा की निर्मिति होती है, उस समय इस ऊर्जा में वायुमंडल की कष्टदायक तरंगों का घनीकरण होकर ये तरंगें मस्तिष्क की रिक्ति में प्रक्षेपित होती हैं । इस कारण जीव को विद्युत का धक्का लगने समान अनुभव होना, अस्वस्थ लगना, खीज होना अथवा मिरगी का दौरा पडना, ऐसे कष्ट होते हैं; इसलिए यथासंभव पूर्णिमा और अमावस्या के रज-तम प्रभारित वायुमंडल में केश न धोएं ।’
– एक विद्वान (श्रीमती अंजली मुकुल गाडगीळजी के माध्यम से, २१.१०.२००५) संदर्भ – सनातन का ग्रंथ ‘केशकी आवश्यक देखभाल
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
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