शनि की साढे साती के प्रभाव को न्यून (कम) करने हेतु हनुमानजी की पूजा करते हैं । यह विधि इस प्रकार है – एक कटोरी में तेल लें एवं उसमें काली उडद के चौदह दाने डालकर, उस तेल में अपना मुख देखें । उसके उपरान्त यह तेल हनुमानजी को चढाएं । जो व्यक्ति अस्वस्थता के कारण मन्दिर नहीं जा सकता, वह भी इस पद्धति अनुसार पूजा कर सकता है । तेल में मुख प्रतिबिम्बित होता है, तब अनिष्ट शक्ति भी प्रतिबिम्बित होती है । वह तेल हनुमान को चढाने पर उसमें विद्यमान अनिष्ट शक्ति का नाश होता है ।

खरा तेली शनिवार के दिन तेल नहीं बेचता, क्योंकि जिस अनिष्ट शक्ति के कष्ट से छुटकारा पाने के लिए कोई मनुष्य हनुमान पर तेल चढाता है, उस शक्ति द्वारा तेली को भी कष्ट दिए जाने की आशंका रहती है । इसलिए हनुमान मन्दिर के बाहर बैठे तेल का विक्रय करनेवालों से तेल का क्रय न कर घर से ही तेल ले जाकर अर्पित करें ।
हनुमानजी को तेल, सिन्दूर तथा मदार के पत्र-पुष्प क्यों अर्पित करने चाहिए ?

पूजा में विशिष्ट देवता को जो विशिष्ट सामग्री अर्पित की जाती है, ‘वह सामग्री उस देवता को प्रिय है’, उदा. गणपति को लाल फूल, शंकरजी को बिल्वपत्र एवं विष्णुजी को तुलसी । प्रत्यक्ष में शंकर, श्रीविष्णु, श्री गणपति जैसे उच्च देवताओं की कोई रुचि-अरुचि नहीं होती । विशिष्ट देवता को विशिष्ट सामग्री अर्पित करने का कारण निम्नानुसार है ।

पूजा का एक उद्देश्य यह होता है कि जिस मूर्ति की पूजा की जाती है उस मूर्ति में चैतन्य निर्मित हो तथा उसका उपयोग हमारी आध्यात्मिक उन्नति के लिए हो । वह चैतन्य निर्मित करने के लिए विशिष्ट देवता की मूर्ति को जो सामग्री अर्पित की जाती है, उसमें उस देवता के महालोक तक फैले पवित्रक (सूक्ष्मातिसूक्ष्म चैतन्यकण) आकर्षित करने की क्षमता अन्य सामग्री की तुलना में अधिक होती है । लाल फूल में श्री गणपति के, बिल्वपत्र में शंकरजी के, तुलसी में श्रीविष्णु के एवं तेल, सिंदूर तथा मदार के फूल-पत्तों में हनुमानजी के पवित्रक आकर्षित करने की क्षमता सर्वाधिक होती है; इसलिए हनुमानजी को तेल, सिंदूर तथा मदार के पत्ते अर्पित करते हैं ।
हनुमानजी को नारियल क्यों एवं कैसे अर्पित करना चाहिए ?

नारियल अच्छी तथा बुरी, दोनों प्रकार की तरंगों को आकर्षित एवं प्रक्षेपित कर सकता है । नारियल अर्पित करने से पूर्व हनुमानजी की मूर्ति के समक्ष नारियल की चोटी कर, हनुमान के सात्त्विक स्पंदन नारियल में प्रविष्ट होने के लिए हनुमानजी से प्रार्थना कीजिए । इसके पश्चात नारियल फोडकर उसका आधा भाग अपने लिए रखिए तथा शेष भाग स्थानदेवता को अर्पित कीजिए । इससे कष्टदायक शक्तियों को उतारा मिलकर वे भी संतुष्ट होती हैं । इसके पश्चात अपने लिए रखे नारियल के आधे भागको प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से हनुमान की सात्त्विक तरंगों का हमें लाभ होता है । कुछ श्रद्धालु देवता को पूर्ण नारियल अर्पित करते हैं । पूर्ण नारियल अर्पित करने से उनके मन में विशुद्ध त्याग की भावना क्वचित उत्पन्न होती है; इससे उन्हें आध्यात्मिक लाभ नहीं होता । अतः संभवतः देवता को पूर्ण नारियल अर्पित नहीं करना चाहिए; इसकी अपेक्षा नारियल फोडकर आधा भाग देवालय में देकर शेष भाग अपने लिए रखकर देवता के तत्त्व का अधिकाधिक लाभ लीजिए । (संदर्भ – सनातन का लघुग्रंथ ‘श्री हनुमान’)
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