
पुणे (महाराष्ट्र) – पुणे जिले का अध्यात्मप्रसार का कार्य देखनेवाली तथा गुरुदेवजी के प्रति दृढ श्रद्धा, ईश्वरप्राप्ति का दृढ निश्चय रखनेवाली, उत्तम नेतृत्वगुणों से युक्त, प्रेमभाव जैसे अनेक गुणों से युक्त श्रीमती मनीषा पाठक (आयु ४१ वर्ष) सनातन के १२३ वें समष्टि संतपद पर विराजमान हुईं । श्रीमती मनीषा पाठक को अनेक शारीरिक कष्ट होते हुए भी अत्यंत लगन के साथ धर्मप्रसार की सेवा करती हैं । सनातन की धर्मप्रचारक सद्गुरु स्वाती खाडयेजी के यह शुभसमाचार सुनाने पर सभी साधक भावविभोर हो गए । इस अवसर पर सद्गुरु स्वाती खाडयेजी ने पू. (श्रीमती) मनीषा पाठकजी को पुष्पमाला अर्पण कर तथा सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया । उन्होंने पू. (श्रीमती) मनीषा पाठकजी के संदर्भ में सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के संदेश का वाचन किया । उस संदेश से वहां उपस्थित सभी साधकों की भावजागृति हुई ।
पू. (श्रीमती) मनीषाजी के साधकों के लिए मार्गदर्शक बोल !
हम सभी का जीवन ‘परम पूज्यमय’ हो !
यदि हम सभी का साधन केंद्रबिंदु केवल और केवल परम पूज्य गुरुदेव होंगे, तो हमारे दोष, अहं और हमारे प्रारब्ध के कारण भले ही कितने भी प्रतिकूल प्रसंग आएं, तब भी हम परम पूज्य गुरुदेवजी के चरण कभी भी नहीं छोड सकते । इस जन्म में हमें परम पूज्य गुरुदेवजी मिले हैं । कोई भी आनेवाला संकट अथवा प्रसंग, गुरुदेवजी से बडा नहीं हो सकता ! गुरुदेवजी ही हमारे सर्वस्व हैं । इसलिए प्रत्येक श्वास के साथ गुरुदेवजी का स्मरण, उनकी सेवा, उनके श्रीचरणों का ध्यान, इस प्रकार हम सभी का जीवन ‘परम पूज्यमय’ बन जाए ! प्रत्येक क्षण हम सभी उन्हें अनुभव कर पाएं, यही श्री गुरुचरणों में प्रार्थना है !
– (पू.) श्रीमती मनीषा पाठक, पुणे, महाराष्ट्र
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