
चेन्नई ( तमिलनाडु ) – अभिभावक अथवा बडों द्वारा बच्चों की हस्तांतरित की हुई सम्पत्ति ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का रखरखाव और कल्याण अधिनियम’ के अंतर्गत वापस नहीं ले सकते । मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में ऐसा महत्वपूर्ण निर्णय दिया कि, यदि दस्तावेजों में यह शर्त होगी, तो भी सम्पत्ति प्राप्त करने वाले को उनकी देखभाल करनी होगी ।
एस. सेल्वाराज सिम्पसन द्वारा बच्चे ने उनको निराधार किए जाने का आरोप करते हुए बच्चे के विरोध में उच्च न्यायालय में याचिका प्रविष्ट की थी । (जन्मदाता मा-पिता की सम्पत्ति हडप कर उन्हें दरदर भटकने के लिए छोड देने वाले बच्चे, यह समाज की नैतिकता निचले स्तर पर जाने का लक्षण है ! – संपादक) न्यायमूर्ति आर. सुब्रह्मण्यम ने कहा कि, कानून की धारा २३ के अंतर्गत किसी ने उसकी सम्पत्ति हस्तांतरित की होगी अथवा किसी को तो भेंट दी और उसकी देखभार करने में वह असफल रहा, तो कानून सम्पत्ति हस्तांतर रद्द करने की मांग संबंधित व्यक्ति कर सकता है । संबंधित कानून के अंतर्गत किसी भी शर्त का समाधान न होने पर न्यायाधीशों एस. सेल्वाराज सिम्पसन की याचिका नकार दी ।
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