आयुर्वेद के प्राथमिक उपचार

‘कोष्ठबद्धताके लिए गंधर्व हरितकी वटी’ औषधि की २ से ४ गोलियां रात सोने से पूर्व गुनगुने पानी के साथ लें । भूख न लगना, भोजन की इच्छा न होना, अपचन होना, पेट में गैस होने जैसे लक्षण हों, तो ‘लशुनादी वटी’ औषधि की १ – २ गोलियां दोनों समय के भोजन से १५ मिनिट पहले चूंसकर खाएं । इससे पाचक स्राव अच्छे से निर्मित होते हैं । कोष्ठबद्धता पर उपरोक्त उपचार १५ दिनों तक करें ।’
– वैद्य मेघराज माधव पराडकर, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (२७.७.२०२२)
अब सनातन की ‘गंधर्व हरितकी वटी’ एवं ‘लशुनादी वटी’ औषधियां उपलब्ध हैं । इन औषधियों की विस्तृत जानकारी (उपयोग) औषधी के डिब्बे के साथ रहे पत्रक में दी गई है ।
पत्रक संभालके रखें । औषधियां चिकित्सक के समादेश (advice) के अनुसार लें ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?