

‘वाराणसी सेवाकेंद्र के प्रांगण में अमरूद का एक पेड है । इस अमरूद के पेड की विशेषता यह है कि उसके कई स्थानों में एक ही स्थान पर ४ से ५ अमरूद आते हैं और एक ही शाखा की एक ही पंक्ति में कई अमरूद आते हैं । इस पेड का तना मध्यम आकार का है । इस पेड की ओर देखने पर आनंद और उत्साह प्रतीत होता है ।’
– (पू.) श्री. नीलेश सिंगबाळ (२२.७.२०२०)
(‘जहां साधक रहते हैं वह आश्रम या सेवाकेंद्र हिन्दू राष्ट्र (ईश्वरीय राज्य) की स्थापना हेतु किए जा रहे समष्टि कार्य के केंद्र हैं । साधक यह कार्य स्वयं की समष्टि साधना के रूप में (समाज को सात्त्विक बनाने हेतु किए जानेवाले प्रयास) करते हैं; इसलिए, साथ ही वे व्यष्टि साधना भी (ईश्वरप्राप्ति हेतु किए जानेवाले प्रयास) करते हैं, उसके कारण उन्हें इस कार्य हेतु ईश्वर के कृपाशीर्वाद मिलते हैं । उसके कारण ऐसे आश्रमों और सेवाकेंद्रों में चैतन्य होता है । इस चैतन्य का परिणाम सेवाकेंद्रों और आश्रम के आस-पास के वातावरण पर भी होता है । इसके कारण उनके परिसर में लगाए गए पेड ताजा दिखाई देते हैं और उनमें भर-भरकर फूल और फल आते हैं ।’ – संकलनकर्ता)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?