‘नाथूराम गोडसे जिंदाबाद’, कहने वालों की सार्वजनिक रूप से भर्त्सना की जानी चाहिए ! -भाजपा सांसद वरुण गांधी

  • देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, इसलिए, कोई कुछ भी कह सकता है । जब कोई हिन्दू देवी-देवताओं या पूजा स्थलों का अपमान करता है, तो तुरंत धर्मनिरपेक्षतावादी और पूरो (अधो) गामी ऐसा कहते हैं । किन्तु, अब कोई यदि नाथूराम गोडसे के बारे में बात कर रहा है, तो किसी को बुरा मानने की क्या जरूरत है ! – संपादक 
  • इस देश में बडी संख्या में ऐसे लोग हैं जो सोचते हैं, कि मोहनदास गांधी के कई निर्णयों और मुसलमानों के तुष्टीकरण से देश अथवा हिन्दुओं को प्रचंड हानि हुई है । वरुण गांधी को समझना चाहिए, कि जब भारत में लोकतंत्र है, तो लोगों के विचारों पर भी विचार करने की आवश्यकता है ! – संपादक

नई दिल्ली : मोहनदास गांधी की जयंती के अवसर पर, २ अक्टूबर को सामाजिक माध्यमों पर ‘नाथूराम गोडसे’ के नाम से एक ‘ट्रेंड’ (एक विषय पर चर्चा) की शुरुआत की गई । बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने इसकी आलोचना की है । “ऐसे अभद्र, दायित्व शून्य व्यवहार से देश को लज्जित न करें ।” वरुण गांधी ने कहा, कि ऐसे लोगों की सार्वजनिक भर्त्सना की जानी चाहिए ।

वरुण गांधी ने कहा, कि भारत सदैव आध्यात्मिक महाशक्ति रहा है । गांधी ही थे जिन्होंने हमारे देश की आध्यात्मिक नींव रखी और हमें नैतिक अधिकार दिया, जो आज भी हमारी सबसे बडी शक्ति है । (वरुण गांधी को यह ध्यान रखना चाहिए, कि भारत सदा आध्यात्मिक गुरु रहा है, गांधी के कारण नहीं ; अपितु, संतों, ऋषि-मुनियों के कारण ! – संपादक) गोडसे जिंदाबाद का ट्वीट करने वालों को सार्वजनिक रूप से लज्जित करना चाहिए । यह मूर्खता है, इसे मुख्यधारा में जगह नहीं दी जानी चाहिए ।