सर्वत्र के साधकों के लिए महत्त्वपूर्ण सूचना !
‘अनेक साधक व्यक्तिगत कारणों से अथवा विभिन्न सेवाओं के निमित्त दोपहिया अथवा चारपहिया वाहन से यात्रा करते हैं । दिनभर के कार्य अथवा सेवा का समय बचाने के लिए साधक रात्रि में लंबी दूरी की यात्रा करते हैं । वर्तमान में आपातकाल की तीव्रता को ध्यान में रखते हुए साधकों को रात्रि में व्यक्तिगत वाहन से लंबी दूरी की यात्रा करने से बचें; उदाहरणार्थ गोवा से पुणे ।

अपवादस्वरूप परिस्थितियों में अथवा किसी अपरिहार्य कारणवश यदि रात्रि में यात्रा करना अत्यंत आवश्यक हो, तो साधक आध्यात्मिक स्तर पर निम्नलिखित उपचार करें ।

१. नींबू से वाहन की कुदृष्टि (नजर) उतारना
किसी बडी अथवा महत्त्वपूर्ण यात्रा पर जाते समय पांच नींबू से वाहन की कुदृष्टि उतारें । वाहन के प्रत्येक पहिए के नीचे एक-एक कर कुल चार नींबू रखें तथा पांचवें नींबू से वाहन की कुदृष्टि (नजर) उतारकर उसे वाहन के सामने रखकर एडी से फोड दें । इसके पश्चात वाहन को आगे बढाकर यात्रा आरंभ करें । वाहन आगे बढने पर पहियों के नीचे रखे चारों नींबू भी फूट जाएंगे । फूटे हुए सभी नींबूबहते हुए जल में विसर्जित कर दें ।
२. उपचार के लिए वाहन में एक नींबू रखें । यात्रा पूर्ण होने पर उस नींबू को बहते हुए जल में विसर्जित कर दें ।
३. यात्रा के समय चालक-साधक तथा अन्य साधक मन ही मन नामजप करते रहें ।
४. यात्रा के समय वाहन में धीमी आवाज में प.पू. भक्तराज महाराजजी के भजन अथवा नामजप चलाएं ।
५. यदि यात्रा के दौरान चालक-साधक को नींद आने लगे, तो वह वाहन को एक ओर रोक दे । आंखों पर पानी के छींटे मारकर आंखों पर आए कष्टदायक आवरण को दूर करें तथा आध्यात्मिक उपचार करने के उपरांत ही आगे की यात्रा करें ।
६. व्यक्तिगत वाहन से रात्रि में यथासंभव अकेले यात्रा न करें ।
साथ में कम-से-कम एक अन्य व्यक्ति अवश्य हो ।
टिप्पणी : अध्यात्मप्रसार की सेवाओं, जैसे ग्रंथ-प्रदर्शनी, सत्संग लेना आदि के लिए साधक व्यक्तिगत वाहन से निकट की यात्रा कर सकते हैं ।
बस/रेल से रात्रि में लंबी दूरी की यात्रा करते समय बरती जानेवाली सावधानी !‘साधक बस/रेल से रात्रि में लंबी दूरी की यात्रा कर सकते हैं; क्योंकि इन वाहनों की निर्धारित समय-सारणी के अनुसार ही यात्रा करनी पडती है । बस/रेल से यात्रा करते समय साधक अपने तथा वाहन के चारों ओर सुरक्षा-कवच निर्मित होने हेतु भगवान से प्रार्थना करें तथा यात्रा में निरंतर नामजप करते रहें ।’ – श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी |
– श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळ (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की एक आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी) (२८.६.२०२६)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !