अमेजन के ’अमेजन नाउ’ विज्ञापन द्वारा महान वैज्ञानिक आर्यभट्ट का अक्षम्य अपमान !

संसार को गणित में ‘शून्य’ जैसी सबसे बडी देन देनेवाले और खगोलशास्त्र की नींव रखनेवाले महान भारतीय वैज्ञानिक आर्यभट्ट न केवल भारत के, अपितु संपूर्ण विश्व के गौरव हैं; परंतु दुर्भाग्यवश, वैश्विक स्तर की विशाल ‘ई-कॉमर्स’ कंपनी ‘अमेजन इंडिया’ द्वारा अपने उत्पादों की बिक्री और ‘निःशुल्क डिलीवरी’ के अत्यधिक प्रचार के लिए इस ऋषितुल्य विभूति का अत्यंत निम्न स्तर पर जाकर उपहास उडाने की बात सामने आई है । इस विज्ञापन के कारण भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक धरोहर पर गर्व करनेवाले नागरिकों में तीव्र आक्रोश की लहर दौड गई है ।

अमेजन द्वारा किया अनादर

१. विज्ञापनाचे विडंबनात्मक स्वरूप आणि बाजारीकरण

श्री. रमेश शिंदे

‘अमेजन’ के इस ‘अमेजन नाउ’ विज्ञापन में आर्यभट्ट को आधुनिक काल में लौटते हुए दिखाया गया है । विज्ञापन का प्रारंभ ही एक अत्यंत अपमानजनक संवाद से होता है, जहां उनसे ‘तुम कौन हो ?’ और ‘चाचा, कौन-सी डिलीवरी है ?’, ऐसा पूछकर एक महान खगोलशास्त्री को सीधे ‘डिलीवरी बॉय’ के स्तर पर लाकर खडा कर दिया गया है । विज्ञापन में उन्हें ‘क्या मानव शून्य का महत्त्व भूल गया है?’, यह ढूंढने के लिए व्याकुल दिखाया गया है और उनके इस वैश्विक शोध-सिद्धांत का संबंध ‘अमेजन’ ने अपनी ‘जीरो डिलीवरी फीस’ (शून्य वितरण शुल्क), ‘जीरो सर्च फीस’ (शून्य खोज शुल्क) और ‘जीरो हैंडलिंग फीस’ (शून्य संचालन शुल्क) जैसी व्यावसायिक छूटों से जोड दिया है । शून्य की खोज मानव इतिहास की एक महान क्रांति है, जिस पर आधुनिक विज्ञान आधारित है । ऐसे अमूल्य सिद्धांत की तुलना ‘अमेजन’ के तुच्छ ‘डिलीवरी शुल्क’ से करना, विज्ञान का अवमूल्यन करनेवाला और वैज्ञानिक धरोहर का अत्यंत भद्दा बाजारीकरण करनेवाला है ।

२. राष्ट्रपुरुषों का विनोदी प्रस्तुतीकरण

आर्यभट्ट को विज्ञापन में सडकों पर इधर-उधर भटकते हुए और लोगों के प्रश्नों के दयनीय ढंग से उत्तर देते हुए दिखाकर उनके व्यक्तित्व को विनोदी (मजाकिया) बनाने का जानबूझकर प्रयास किया गया है । ‘मनोबल और चप्पल दोनों टूट गए’, जैसे उपहासपूर्ण संवाद उनके जैसे महान ऋषि के विषय में उपयोग करना अत्यंत निंदनीय है । व्यावसायिक लाभ के लिए और केवल ‘कॉर्पोरेट’ (व्यावसायिक) लाभ के लिए अपने गौरवशाली इतिहास का ऐसा विकृतिकरण कंपनियों को करने नहीं दिया जा सकता । राष्ट्रपुरुषों को केवल विनोदी पात्र के रूप में प्रस्तुत करने के कारण युवा पीढी के सम्मुख हमारे इतिहास और राष्ट्रीय प्रतीकों की विकृत छवि निर्मित होती है, ऐसा इतिहास प्रेमियों द्वारा कहा जा रहा है ।

३. ‘अमेजन’ का विवादास्पद इतिहास और वैधानिक कार्रवाई

यह कोई पहली बार नहीं है जब व्यावसायिक लाभ के लिए भारतीय संस्कृति और हिन्दू प्रतीकों का ‘अमेजन’ ने अनादर किया है । इससे पूर्व भी कंपनी की वेबसाइट पर श्री गणेश और माता लक्ष्मी के चित्रोंवाले पायदान, ‘टॉयलेट सीट कवर्स’ बेचना, साथ ही ‘तांडव’ वेब सीरीज के माध्यम से धार्मिक भावनाएं आहत करने के प्रकरण में, तीव्र विरोध के पश्चात कंपनी को सार्वजनिक क्षमा याचना करनी पडी थी । केवल व्यावसायिक लाभ के लिए भारतीय राष्ट्रपुरुषों का जानबूझकर अपमान करने का यह कृत्य संशोधित ‘भारतीय न्याय संहिता’ की धारा २९९ (धार्मिक भावनाएं आहत करना), धारा १९६ और १९७ (समाज में वैमनस्य उत्पन्न कर राष्ट्रीय अखंडता को बाधा पहुंचाना) तथा धारा ३०२ (धार्मिक भावनाएं आहत करने का उद्देश्य) के अंतर्गत सीधे आपराधिक और दीवानी कार्रवाई के योग्य है ।

इसी कारण सर्वोच्च न्यायालय में कार्यरत और हिन्दू जनजागृति समिति की अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने ‘अमेजन’ को कठोर वैधानिक (कानूनी) नोटिस भेजा है । ‘अमेजन’ भारतीय जनता से सार्वजनिक क्षमा मांगकर विवादास्पद विज्ञापन सभी डिजिटल माध्यमों से तत्काल हटाए, अन्यथा कंपनी के विरुद्ध आपराधिक और दीवानी अभियोग (मुकदमा) पंजीकृत किया जाएगा, ऐसी स्पष्ट चेतावनी दी गई है । वर्तमान में इस विज्ञापन के विरोध में सामाजिक माध्यमों (सोशल मीडिया) पर ‘अमेजन’ के बहिष्कार का (#Boycott_Amazon) ऑनलाइन अभियान प्रचंड वेग से फैल रहा है और भारत के महान सुपुत्र का अनादर करनेवाली वैश्विक कंपनी शीघ्र क्षमा मांगे, यही समस्त राष्ट्रप्रेमी नागरिकों की आग्रहपूर्ण मांग है ।

– श्री. रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति. (१५.६.२०२६)

संपादकीय भूमिका

 व्यावसायिक स्वार्थ के लिए राष्ट्रपुरुषों का उपहास कब तक सहन करें ?