इजरायल वास्तविकता का भान रखे – अब अमेरिका ही उसका एकमात्र मित्र । – JD Vance

ईरान समझौते पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने इजरायल के प्रधानमंत्री को खरी-खरी सुनाई ।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वांस

वॉशिंग्टन (अमेरिका) – इजरायल वास्तविकता का भान रखे तथा इजरायल के सबसे बडे मित्रराष्ट्र की अकारण आलोचना करना टालें, इन कठोर शब्दों में अमेरिका के उपराष्ट्रपति वांस ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू को खरी-खरी सुनाई । व्हाईट हाऊस में आयोजित एक पत्रकारवार्ता में वे ऐसा बोल रहे थे । अमेरिका एवं ईरान के मध्य हुए शांति समझौते के विषय में नेतान्याहू ने अप्रसन्नता व्यक्त की थी । उसके कारण अमेरिका ने इजरायल को खरी-खरी सुनाई ।

जे.डी. वांस ने आगे कहा, ‘‘पूरे विश्व में इजरायल किसी को प्रिय नहीं है । केवल अमेरिका ही उसका एकमात्र शक्तिशाली मित्र बचा है । मैं इजरायल को दो संदेश देना चाहता हूं । पहला यह कि वर्तमान विश्व में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ही इजरायल के प्रति सहानुभूति रखनेवाले एकमात्र प्रभावी राष्ट्रप्रमुख हैं तथा मेरा दूसरा संदेश यह है कि इजरायल अमेरिका की आलोचना न करे ।’’

‘लोगों को मार देना’ हर समस्या का समाधान नहीं हो सकता !

जे.डी. वांस ने ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’के साथ की गई भेंटवार्ता में इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षामंत्री इतामार बेन ग्विर एवं वित्तमंत्री बेजालेल स्मोट्रचि की भूमिका की भी आलोचना की । वांस ने कहा कि उनका प्रस्ताव निश्चित रूप से क्या है ? केवल ९० लाख जनसंख्यावाले देश की (अर्थात इजरायल की) सुरक्षा से संबंधित हर समस्या का समाधान लोगों को मार देना नहीं हो सकता । ईरान शांति समझौते को लेकर इजरायल में अनावश्यक भय उत्पन्न किया जा रहा है । दीर्घकालीन शांति एवं राजनीतिक समाधान ही इस प्रदेश की स्थिरता का मार्ग है ।

इजरायल की रक्षा के लिए अमेरिका की अरबों डॉलर्स की सहायता ।

इजरायल को मिलनेवाली अमेरिकी सैन्य सहायता का उल्लेख करते हुए जे.डी. वांस ने कहा कि इजरायल की रक्षा के लिए उपयोग किए जानेवाले कुल हथियारों में से लगभग दो तिहाई हथियार अमेरिका में बनाए जाते हैं तथा उसके लिए अमेरिका के करदाताओं का पैसा खर्च होता है । इसलिए अमेरिका को ही एक समस्या माननेवाले इजरायल के नेताओं को वास्तविकता समझ लेनी चाहिए । ‘रॉइटर्स’के ब्योरे के अनुसार अमेरिका इजरायल को प्रतिवर्ष ४ अरब डॉलर्स की (अनुमानित ३७ सहस्र ७६० करोड रुपए की) सैन्य सहायता देता है ।

इजरायल के अधिकारियों केअनौपचारिकरूप से इस समझौते के कारण ईरान के परमाणु एवं बैलिस्टिक क्षेपणास्त्र कार्यक्रम का कोई समाधान नहीं निकला है, ऐसी संभावना व्यक्त की है । प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भले ही सीधे उपराष्ट्रपति के इस वक्तव्य पर टिप्पणी करना टाला हो, तब भी ‘इजरायल अमेरिका के साथ के संबंधों को महत्त्व देता है, परंतु उन्होंने इजरायल दक्षिणी लेबनाॅन में चल रही कार्यवाही चालू रखेगा’, ऐसी सतर्कतापूर्ण भूमिका ली है ।