
१. गोवंश की हत्या करने के प्रकरण में ५ धर्मांध आरोपियों को बंदी बनाया जाना तथा जमानत
‘होली के दिन धर्मांधों ने उत्तर प्रदेश के शामली जिले के जंगल में गाय सहित २ बछडों की हत्या की । उसकी भनक लगने पर आसपास के गांव के हिन्दू क्षुब्ध हो गए । पुलिस ने इस प्रकरण में अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध अपराध पंजीकृत किए । अपराध पंजीकृत करने पर भी पुलिस कुछ नहीं कर रही है, यह देखकर हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों ने ‘सडक बंद’ आंदोलन किया । उससे वहां का वातावरण बहुत संवेदनशील होकर कानून-व्यवस्था संकट में पडने की स्थिति उत्पन्न हो गई । उसके उपरांत पुलिस द्वारा की गई जांच में लावा दाऊदपुर के ५ धर्मांधों ने गोवंश की हत्या की, यह बात सामने आई । पुलिस जब आरोपियों को पकडने के लिए गई, तब धर्मांधों ने पुलिस पर ही गोलीबारी की । उसके उपरांत भी पुलिस ने कुछ आरोपियों को हथियारों के साथ बंदी बनाया तथा गोमाता के अंगों का पंचनामा कर उनके विरुद्ध ‘उत्तर प्रदेश गोहत्या प्रतिबंधक कानून’ के अंतर्गत अपराध पंजीकृत किया । उसमें भी आरोपियों को कुछ ही दिन में जमानत मिल गई । पुलिस ने आवश्यक वस्तुएं अपने नियंत्रण में ली । अन्वेषण पूर्ण हुआ तथा आरोपियों के साक्ष्य भी पंजीकृत किए गए । ऐसी स्थिति में ‘आरोपियों की पुलिस हिरासत किसलिए ?’, यह न्यायालय का दृष्टिकोण होता है और इसलिए आरोपियों को जमानत मिलती है ।

२. धर्मांधों के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षाकानून के अंतर्गत अपराध पंजीकृत
इन सभी आरोपियों की आपराधिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ के अंतर्गत अपराध पंजीकृत किया तथा उन्हें १२ महिने के लिए बंदी बनाने का प्रस्ताव जिला दंडाधिकारी को भेजा । इस पर जिला दंडाधिकारी ने सकारात्मक भूमिका अपनाते हुए आरोपियों को १२ महिने के लिए स्थानबद्ध करने का आदेश दिया । उस आदेश में जिला दंडाधिकारी ने कहा, ‘यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, अपितु यह विषय हिन्दुओं की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील एवं धार्मिक आस्था का विषय है । किसानों सहित अन्य लोगों के लिए भी गाय पूजनीय है । इसलिए बार-बार गोहत्याएं करने से आरोपियों के विरुद्ध समाज में रोष उत्पन्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक सुव्यवस्था का प्रश्न उत्पन्न होकर शांति संकट में पड जाती है ।’
३. आरोपी के पिता की ओर से उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय में ‘हेबियस कॉर्पस’ रिट याचिका प्रविष्ट
आरोपी के पिता की ओर से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज उच्च न्यायालय में ‘हेबियस कॉर्पस’ रिट याचिका प्रविष्ट की गई । (‘हेबियस कॉर्पस’ याचिका अर्थात किसी भी व्यक्ति को गैरकानूनी रूप से अथवा बिना किसी कारण बंदी बनाकर रखने पर पुलिस अथवा संबंधित प्रशासन को उस व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष प्रत्यक्ष उपस्थित करने का आदेश दिया जाता है ।) यह प्रकरण न्यायाधीश मुनीर एवं न्यायाधीश संजीव कुमार की द्विसदस्यीय खंडपीठ के सामने सुनवाई के लिए आया । वहां आरोपी के पक्ष में तर्कवाद करते हुए एक ही घटना के विषय में विभिन्न कानूनी धाराओं के अंतर्गत अपराध पंजीकृत किए जाने का सूत्र उठाया गया । इस समय आरोपी के अधिवक्ता ने तर्कवाद करते हुए कहा, ‘आरोपी जब न्यायिक हिरासत में था, उस समय यह सब प्रक्रिया चलाई गई । वास्तव में इस अभियोग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत बंदी बनाने जैसी स्थिति नहीं है । इससे पूर्व भिन्न-भिन्न न्यायालयों ने उसे इसी प्रकरण में गोहत्या प्रतिबंधक कानून एवं हथियार से संबंधित कानून में जमानत दी थी । उसके उपरांत उन्हें पुनः राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत बंदी बनाया जाना अवैध है; इसलिए पुलिस आरोपी को तत्काल छोड दे ।’

४. उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से याचिका खारिज
इस प्रकरण में उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय एवं विभिन्न उच्च न्यायालयों के अनेक अभियोगों का आधार लेकर घोषित किया, ‘किसी सूत्र के आधार पर ‘जनआक्रोश’ होनेवाला हो, साथ ही आरोपी यदि इसी प्रकार के अपराध कर कानून-व्यवस्था को संकट में डालनेवाला हो, तो उसे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत बंदी बनाया जाता है । गोमाता का विषय अत्यंत संवेदनशील है । इसलिए ऐसी घटनाएं पुनः न होें; इस हेतु शामली जिला दंडाधिकारी का राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अंतर्गत १२ महिने बंदी बनाने का प्रस्ताव उचित सिद्ध होता है ।’ यह टिप्पणी कर उच्च न्यायालय ने धर्मांध आरोपी के पिता की ‘हेबियस कॉर्पस’ रिट याचिका खारिज की ।
इस प्रकरण की विशेषता यह है कि जंगल में घटित गोवंश की हत्या के विषय में भी उत्तर प्रदेश के हिन्दुत्वनिष्ठों ने जागरूकता से आंदोलन किया । उसका संज्ञान लेते हुए पुलिस एवं प्रशासन ने आरोपियों पर तुरंत बंदी बनाने की कार्रवाई की । दुर्भाग्य से महाराष्ट्र में ऐसा होना दुर्लभ है ।’
श्रीकृष्णार्पणमस्तु ।
– (पू.) अधिवक्ता सुरेश कुलकर्णी, मुंबई उच्च न्यायालय (१.५.२०२६)
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