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मुंबई/रत्नागिरी – वारकरी संप्रदाय, संत परंपरा एवं श्री विठ्ठल भक्ति का घोर अनादर करनेवाले तथा श्री विठ्ठल भक्तों को हिंसक दिखाने वाले ‘ईठ्ठला’, इस नाटक के विरोध में हिन्दू जनजागृति समिति, साथ ही वारकरी संप्रदाय द्वारा लडी जा रही लडाई को बडी सफलता मिली है । महाराष्ट्र सरकार के ‘रंगभूमि प्रयोग परिनिरीक्षण विभाग’ ने इस नाटक के निर्माता को ८ जून २०२६ को आधिकारिक पत्र लागू कर उसमें प्रस्तुत प्रसंगों में वारकरी संप्रदाय का अनादर टालने हेतु इस नाटक का संपूर्ण विवादित भाग, श्री विठ्ठलमूर्ति एवं संतों के नामों को तुरंत हटाने के आदेश दिए हैं ।
🚨 Hindu Sentiments Vindicated! 🚨
The Maharashtra Rangabhumi Censor Board has directed the producer of the controversial play ‘Itthala’ to remove objectionable content, change the play’s title, and resubmit a revised script for approval.
This comes as a major victory for the… pic.twitter.com/81S7h4ygGg
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) June 10, 2026
१. रत्नागिरी में संपन्न ६४ वें ‘राज्य हौशी मराठी नाटक प्रतियोगिता’ में वीरशैव समाज (लांजा) द्वारा निर्मित तथा अमोल रेडीज द्वारा लिखित-निर्देशित ‘ईठ्ठला’ नाटक प्रस्तुत किया गया था । इस नाटक के व्यक्ति पात्रों को ‘तुका’, ‘जना’, ‘नामा’, इस प्रकार से संतों के नाम देकर उनके हाथों हत्या एवं लडके की हत्या होती हुई दिखाकर वारकरियों को अपराधी ठहराया गया था ।
२. हिन्दू जनजागृति समिति एवं वारकरी संप्रदाय की ओर से जताई गई आपत्ति को ध्यान में लेकर रंगभूमि प्रयोग परिनिरीक्षण विभाग के सचिव सं.पुं. खामकर ने नाटक के निर्माता को दिए गए आदेश में कहा है कि इस नाटक के व्यक्ति पत्रों को जो संतों ने नाम दिए गए हैं, उन्हें बदला जाए, इस नाटक का शीर्षक बदला जाए, नाटक में दिखाए गए परिवार को ‘वारकरी सांप्रदायिक’ न दिखाकर उसे धार्मिक एवं भोला भाला वारकरी दिखाया जाए तथा उनके द्वारा किसी की हत्या की गई है, ऐसा नहीं दिखाया जाए । इससे किसी विशिष्ट संप्रदाय की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होंगी । रंगमंच पर प्रत्यक्ष श्री विठ्ठल की मूर्ति तथा उस परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत विवादित प्रसंग टालें जाएं । ‘किसी को नहीं मारना चाहिए, ऐसा विठ्ठल ने कहां लिखा है ?’, इस विवादित वाक्य को नाटक की संहिता से हटाया जाए तथा विभाग की मान्यता के लिए संशोधित संहिता प्रस्तुत की जाए ।
३. समिति के प्रतिनिधि मंडल ने मुंबई में राज्य के उद्योग एवं मराठी भाषा मंत्री तथा रत्नागिरी जिले के प्रभारी मंत्री उदय सामंत से भेंट की । श्री. सामंत ने इसका तुरंत संज्ञान लेकर नाटक के निर्माता को खरी-खरी सुनाई थी ।
रंगभूमि प्रयोग परिनिरीक्षक विभाग ने इसका गंभीरता से संज्ञान लेकर आदेश दिए जाने के कारण वारकरी संप्रदाय एवं हिन्दू जनजागृति समिति ने मंत्री महोदय के प्रति आभार व्यक्त किया ।
रंगभूमि प्रयोग परिनिरीक्षण विभाग ने नाटक को मान्यता दी ही कैसे ? – सुनील घनवट![]() समिति के महाराष्ट्र राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट ने कहा, ‘‘यह केवल एक नाटक का विरोध नहीं है, अपितु यह समस्त वारकरी संप्रदाय तथा हिन्दुओं की जागृत अस्मिता की बडी विजय है । अभिव्यक्ति की स्वंत्रतता के नाम पर हमारे इष्टदेता, श्री विठ्ठल एवं पूजनीय संतों का घोर अनादर करनेवाला यह अघोरी प्रकार उक्त आदेश के कारण संपूर्णतः रूका, परंतु हमारा यह प्रश्न है कि रंगभूमि परिनिरीक्षण विभाग ने (मराठी नाटकों के लिए सेंसर बोर्ड) ने ऐसे नाटक को मान्यता दी ही कैसे ? इसके आगे रंगभूमि परिनिरीक्षण विभाग हिन्दुओं के आस्था के केंद्रों पर आघात करनेवाले नाटकों को मान्यता न दें तथा उनके लिए नियमावली बनाए । हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड करनेवाली प्रवृत्तियों से इसके आगे भी इसी प्रकार से स्पष्टीकरण पूछा जाएगा ।’’ |

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