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मुंबई, ९ जून (संवाददाता) – नासिक के टी.सी.एस्. प्रतिष्ठान में हिन्दू महिलाओं को लव जिहाद के जाल में फंसाकर उनके धर्मांतरण का प्रयास किया गया । ऐसा होकर भी इसमें संलिप्त आरोपियों पर धर्मांतरण का अपराध पंजीकृत करने के स्थान पर केवल धार्मिक भावनाएं आहत करने तथा शीलभंग के अपराध पंजीकृत किए गए । हिन्दू विधिज्ञ परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने २० अप्रैल को राज्य महिला आयोग को पत्र लिखकर इस अन्वेषण पर संदेह व्यक्त किया था । परिषद के पत्र का संज्ञान लेकर ‘इस प्रकरण का धर्मांतरण की दृष्टि से अन्वेषण कर जांच का ब्योरा प्रस्तुत किया जाए’, ऐसे निर्देश आयोग ने नासिक के पुलिस आयुक्त को दिए हैं ।

१. अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर के इस पत्र के आधार पर आयोग ने २३ अप्रैल को नासिक के पुलिस आयुक्त को पत्र लिखा । आयोग ने इस पत्र की प्रति जानकारी हेतु अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर को भेजी । इस पत्र में यह भी कहा गया है कि हिन्दू विधिज्ञ परिषद ने जो संदेह व्यक्त किया है, उसे देखते हुए यह प्रकरण अत्यंत गंभीर दिखाई देता है, अतः पत्र में दिए गए सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण का अन्वेषण किया जाए ।
२. महाराष्ट्र सरकार ने १४ मार्च २०२६ को धर्मांतरण विरोधी कानून पारित किया, परंतु ‘टी.सी.एस्.’ प्रकरण में पंजीकृत कुल ९ में से एक भी अपराध इस कानून के अंतर्गत पंजीकृत नहीं किया गया है । पीडित महिला द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इसमें उसके धर्मांतरण के प्रयास स्पष्टता से दिखाई देते हुए भी अपराध पंजीकृत करते समय क्या इस सूत्र को जानबूझकर बाजू में रख दिया गया है ?, ऐसा संदेह अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने इस पत्र में व्यक्त किया है ।
३. ‘उचित अनुच्छेद के अंतर्गत अपराध पंजीकृत किए जाने के कारण आरोपियों को इस गंभीर अपराध से छूटने के अवसर मिल रहे हैं, ऐसा भी अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर ने इस पत्र में कहा है । इस पत्र की प्रति उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी भेजी है ।
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