कई दशकों से चली आ रही भारत की परमाणु नीति में बडा बदलाव
स्टॉकहोम (स्वीडन)/नई दिल्ली – वैश्विक स्तर पर शस्त्रों पर दृष्टि रखने वाली स्वीडन की ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट’ अर्थात ‘सिप्री’ ने भारत के संबंध में बडी घोषणा की है । सिप्री के अनुसार भारत ने कम-से-कम १२ परमाणु शस्त्र ‘सक्रिय’ स्थिति में तैनात कर दिए हैं । यह उद्घोष भारत की लंबे समय से चली आ रही परमाणु नीति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है ।
सिप्री का कहना यह है कि ये शस्त्र भारतीय नौसेना, पनडुब्बियों या अन्य वाहक प्रणालियों पर सतत तैनात रखे गए हैं । संक्षेप में, यदि किसी देश ने भारत पर परमाणु शस्त्रोंका उपयोग करने का प्रयास किया, तो भारत तत्काल परमाणु शस्त्रों के माध्यम से प्रति आक्रमण के लिए समर्थ है ।
सिप्री के गत प्रतिवेदनों में भारत के परमाणु शस्त्रों का वर्णन ‘तैनात’ किए हुए नहीं, अपितु ‘एकत्रित’ (स्टॉकपाइल) के रूप में किया जाता था ।
भारत के परमाणु शस्त्रों की परिचालन पद्धति में महत्वपूर्ण बदलाव – जानें विस्तार से !
१. सिप्री की प्रतिवेदन के अनुसार, भारत के पास कुल १९० परमाणु शस्त्र हैं ।
२. शांति के समय भारत अपने परमाणु शस्त्रोंको प्रक्षेपकों से अलग रखता आया है, ऐसा लंबे समय से माना जाता था । यद्यपि वर्तमान समय की गतिविधियों – जैसे मिसाइलों को संरक्षक आवरण (कैनिस्टर) में रखना एवं समुद्र में निरोधक परिभ्रमण से यह संकेत मिलता है कि भारत अब शांति के समय भी कुछ परमाणु शस्त्रों को प्रक्षेपकों से जोड कर रखने की ओर बढ रहा है ।
३. अगस्त २०२४ से भारत ने दो परमाणु-क्षमता वाली मिसाइल वाहक पनडुब्बियां ‘आई.एन.एस. अरिघाट‘ एवं ”आई. एन.एस अरिंदम‘ को सक्रिय किया है । ये दोनों पनडुब्बियां परमाणुशस्त्र-योग्य मिसाइलें लेकर चलने में सक्षम हैं ।
४. पाकिस्तान के पास १७० परमाणु शस्त्र हैं; परन्तु इनमें से कोई भी वर्तमान में तैनात नहीं माना जाता ।
५. भारत अब पाकिस्तान की तुलना में तीव्रगति से परमाणु शस्त्रोंका उत्पादन कर रहा है एवं इन प्रयासों पर भारी धनराशि व्यय की जा रही है ।
भारत ने गत वर्ष परमाणु शस्त्र निर्माण पर व्यय किए २७ सहस्त्र करोड रुपये !‘इंटरनेशनल कैंपेन टू एबॉलिश न्यूक्लियर वेपन्स’ संस्था के प्रतिवेदन में उजागर किया गया है कि वर्ष २०२५ में वैश्विक रूप से परमाणु शस्त्रों पर होने वाला व्यय अत्यंत चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया । भारत ने भी परमाणु शस्त्रों पर अपना व्यय बढाया है, यद्यपि कुल व्यय के संबंध में भारत, चीन एवं अमेरिका की तुलना में बहुत पीछे है । वर्ष २०२५ में विश्व भर में परमाणु शस्त्रों पर कुल ११९ अरब डॉलर व्यय किए गए । इस प्रतिवेदन के अनुसार अमेरिका ने ६९.२ अरब डॉलर, चीन ने १३.५ अरब डॉलर एवं भारत ने २.८ अरब डॉलर (२६,७११ करोड भारतीय रुपये) परमाणु शस्त्रों पर व्यय किए । |

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