महाराष्ट्र में २ जून से आंदोलन, घंटानाद, महाआरती एवं हस्ताक्षर अभियान आरंभ होगा ।

भीमाशंकर एवं अष्टविनायक मंदिरों सहित सहस्त्रों प्रमुख देवस्थलों ने ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन (प्रारूप) अधिनियम, २०२६’ कानून के विरुद्ध एकजुटता दिखाई है ।

पुणे – देवस्थानों की भूमि की रक्षा होने पर ही मंदिर एवं धार्मिक कार्य सुरक्षित रहेंगे । इसलिए सरकार को इन भूमि का अधिग्रहण करने का काम त्वरित रोक देना चाहिए, ऐसी चेतावनी भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग देवस्थान एवं अष्टविनायक समिति सहित पुणे पंचक्रोशी के सहस्त्रों प्रमुख देवस्थानों ने ‘महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन (प्रारूप) अधिनियम, २०२६’ के विरुद्ध दी है । इस संबंध में मंदिर महासंघ की ओर से पुणे में महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं । कानून के विरुद्ध अगले २५ दिनों में लाखों कानूनी आपत्तियां प्रविष्ट करने के साथ-साथ राज्यव्यापी व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा । इसके साथ ही प्रत्येक मंदिर में महाआरती, आगामी मानसून सत्र के समय विधानमंडल में ‘घंटानाद आंदोलन’ एवं आवश्यकता पडी तो मुंबई के आजाद मैदान में ‘महाआंदोलन’ करने तथा शीघ्र ही ‘राज्यस्तरीय देवस्थान भूमि संरक्षक परिषद’ आयोजित करने का सर्वसम्मत निर्णय लिया गया एवं मंदिर प्रकरणों के विश्वस्तों ने मैदान में उतरने की घोषणा की है ।

श्री. सुनील घनवट

मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय समन्वयक श्री सुनील घनवट ने कहा कि “यह लडाई मंदिरों की अस्मिता की है” एवं २ जून को विभागीय आयुक्तों को ज्ञापन देकर राज्यभर में आंदोलनों का प्रारंभ किया जाएगा, सरकार के प्रति ऐसी चेतावनी भी दी । पुणे के सारसबाग स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर, आकुर्डी के खंडोबा मंदिर एवं हडपसर के श्री सियाराम मंदिर, गोशाला में बैठकें आयोजित की गईं ।

महाराष्ट्र मंदिर महासंघ

१. वरिष्ठ अधिवक्ता एस.के. जैन ने देवस्थानों के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए उनकी भूमि का सुरक्षित होना अत्यंत आवश्यक बताया ।

२. पूर्व धर्मादाय आयुक्त दिलीप देशमुख ने कहा कि कानून के लाने के पीछे शासन का मनतव्य संदिग्ध प्रतीत होता है एवं विश्वस्तों से अधिकाधिक आपत्तियां प्रविष्ट कराने का आह्वान किया ।

३. रांजणगांव के महागणपति देवस्थान के विश्वस्त डॉ. तुषार पाटील पाचुंदकर ने अष्टविनायक मंदिरों की ओर से इस कानून का तीव्र विरोध किया ।

४. भीमाशंकर देवस्थान के अधिवक्ता सुरेश कौदरे ने सेवाधारकों के अधिकारों की रक्षा की मांग की ।

आंदोलन की रणनीति निश्चित करने तथा प्रत्येक मंदिर में जनजागरण के फलक लगाकर व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने के लिए राज्यभर के प्रमुख विश्वस्त एकत्र किए गए हैं ।

इन बैठकों में भीमाशंकर देवस्थान के कार्याध्यक्ष मधुकर गवांदे, प्रसाद गवांदे, ग्रामदैवत कसबा गणपति की संगीताताई ठकर, भवानीपेठ पालखी मंदिर के प्रमोद बेंगरूट, कानिफनाथ मंदिर के ज्ञानोबा एवं सुरेश फडतरे, श्रीमंत सरदार खासगीवाले लिमये, निलेश वाळावे (शिरवळ), निवृत्ती बडदे (कोडीत), अखिल मंडई गणेशोत्सव मंडल के वांजळे, जेजुरी मार्तंड देवस्थान एवं दगडूशेठ दत्त मंदिर के अधिवक्ता थोरवे, आकुर्डी खंडोबा देवस्थान के अध्यक्ष विठ्ठल काळभोर एवं उपाध्यक्ष पंढरीनाथ काळभोर, तथा चतुःश्रृंगी देवस्थान की विश्वस्त व अधिवक्ता वृषाली दातार सहित विधि एवं धार्मिक क्षेत्र के कई मान्यवर बडी संख्या में उपस्थित रहे ।