Temple Gold Theft : केरलम् के प्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के करोडों रुपए के सोने के आभूषण लुप्त

गुप्तचर ब्योरे में दी गई जानकारी

थिरूवनंतपूरम् (केरलम्) – केरलम् के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के संदर्भ में गुप्तचर ब्योरा सामने आया है । इसमें मंदिर से मूल्यवान वस्तुएं गायब होना, सोने के आभूषण गायब होना, सुरक्षा में त्रुटियां होना तथा भक्तों द्वारा अर्पित दान का अनुचित पद्धति से उपयोग होना जैसी अनियमितताएं सामने आई हैं । पुलिस महानिदेशक ने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तचर) के द्वारा प्राप्त जानकारी के आधार पर केरलम् के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र भेजा है । इस ब्योरे में मंदिर में स्थित मूल्यवान वस्तुओं के व्यवस्थापन एवं सुरक्षा के विषय में गंभीर चिंता व्यक्त की गई है ।

ब्योरे में रखे गए सूत्र ।

सोने की भेंट वस्तुएं लुप्त 

पिछले कुछ माह में भक्तों द्वारा मंदिर के रखरखाव हेतु दान दिए गए ७८ ग्राम सोने का बिस्कुट एवं सिक्के गायब हैं । पहले देखभाल के लिए निकाला गया सोने का एक बहुस्तरीय (मल्टिलेयर्ड) दीप अब मंदिर परिसर में नहीं है ।

देवता के सोने के आभूषण भी लुप्त 

मूलरूप से सोने के दीप को चांदी के दीप में परिवर्तित किया गया है । इस परिवर्तन की कोई भी आधिकारिक प्रविष्टि उपलब्ध नहीं है । ‘वैरा नामा’ नाम का एक पारंपरिक आभूषण है, जिसे सामान्यतः मंदिर के गर्भगृह के अंदर रखा जाता है । सुधार एवं देखभाल के नाम पर उसे निकाले जाने के ६ माह पश्चात भी उसे अब तक उसके मूल स्थान पर नहीं रखा गया है ।

सुरक्षा पडताल की अनदेखी 

मंदिर के कुछ कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी एवं त्रावणकोर राजवंश से संबंधित कुछ लोग चेंबकाथुम्मूडू प्रवेशद्वार पर अनिवार्य सुरक्षा पडताल की अनदेखी कर रहे थे । इस ब्योरे में ऐसे अनेक लोगों के नाम दिए गए हैं, जो बिना किसी सुरक्षा पडताल के बार-बार मंदिर में आते-जाते रहते थे ।

‘स्ट्राँग रूम’में सोना-चांदी रखने के लिए कहा 

जांच के निष्कर्ष के उपरांत अधिकारियों ने मंदिर की सुरक्षा और मजबूत करने के लिए तथा मूल्यवान वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए अनेक उपाय सुझाएं हैं । उनमें वर्तमान में तिजोरी के बाहर रखा गया सोना, चांदी एवं अन्य मूल्यवान वस्तुओं को ‘स्ट्राँग रूम’में (मूल्यवान वस्तुओं अथवा महत्त्वपूर्ण कागदपत्रों को अत्यंत सुरक्षित रखने हेतु बनाया गया मजबूत सुरक्षित कक्ष) स्थानांतरित करना, साथ ही भक्तों से मिलनेवाले सभी दान के उचित कागदपत्र बनाकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने की बात कही गई है ।

पुलिस के कठोर देखरेख की सहमति देना 

सभी लॉकर्स एवं समान रखने के स्थानों पर पुलिस की कठोर देखरेख होनी चाहिए । सुरक्षा नियम तोडे जाने पर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाए । प्रत्येक व्यक्ति को चाहे वह किसी भी पद पर हो अथवा वह कितना भी प्रतिष्ठित हो, उसे मंदिर परिसर में प्रवेश करने से पूर्व एक निश्चित सुरक्षा पडताल से गुजरना होगा ।

सर्वोच्च न्यायालय की समिति मंदिर का व्यवस्थापन करती है 

पद्मनाभस्वामी मंदिर केरलम् सरकार के नियंत्रण में स्थित किसी भी ‘देवस्वम बोर्ड’ के अंतर्गत नहीं आता । सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा गठित एक कार्यकारी समिति इस मंदिर का व्यवस्थापन करती है, जो नित्य प्रशासनिक गतिविधियों के लिए उत्तरदायी है । जिला न्यायाधीश इस समिति के कार्यकारी प्रमुख के रूप में काम करते हैं । इस समिति में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि, साथ ही भाजपा नेता करमना जयन का भी समावेश है । इस समिति में केरलम् सरकार के प्रतिनिधि के रूप में अधिवक्ता वेलायुधन हैं । एक अन्य सदस्य श्री. मूलम् थिरुनल राम वर्मा हैं, जो त्रावणकोर राजवंश के प्रमुख हैं । आदित्य वर्मा भी राजवंश के प्रमुखों के नामनिर्देशित के रूप में इस समिति के अंग हैं । इस कार्यकारी समिति में मंदिर के मुख्य पुजारियों का भी समावेश है ।

संपादकीय भूमिका

अब हिन्दुओं के मंदिरों का नियंत्रण भक्तों को सौंपने का समय आ गया है, यह इस घटना से ध्यान में आ रहा है तथा इसके लिए भक्तों को राष्ट्रीय स्तर पर संगठित होकर सरकारों को बाध्य करना चाहिए