गढ -किलों पर से अतिक्रमण हटाने के लिए जनवरी मास में निकाले गए परिपत्रक पर ५ मास के उपरांत भी कोई कार्रवाई नहीं !

​महाराष्ट्र सरकार के परिपत्रक को कोल्हापुर जिला प्रशासन द्वारा ठेंगा !

​श्री. अजय केळकर, कोल्हापुर

​कोल्हापुर, २४ मई (वार्ता.) – राज्य के समस्त गढ -किलों के संदर्भ में महाराष्ट्र सरकार ने परिपत्रक द्वारा जनवरी २०२६ में एक आदेश निर्गमित किया था । इसके अनुसार समस्त गढ -दुर्गों पर से अतिक्रमण दूर करने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में प्रत्येक जिले में एक समिति स्थापित करने के लिए कहा गया था । इसमें १ फरवरी से ३१ मई तक समयबद्ध पद्धति से अतिक्रमण हटाने का कार्य करने तथा समय-समय पर किए गए कार्यों का प्रतिवेदन सरकार को प्रस्तुत करने का उल्लेख था । इसमें स्तब्ध करनेवाली बात यह है कि कोल्हापुर जिले ने इस संदर्भ में एक साधारण समिति स्थापित करने का सौजन्य भी नहीं दिखाया है, ऐसी जानकारी ‘सनातन प्रभात’ को प्राप्त हुई है ।

​श्री. अजय केळकर

​१. महाराष्ट्र में वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अंतर्गत कुल ४७ केंद्र संरक्षित गढ , तो ‘पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशालय’ के अंतर्गत ६२ राज्य संरक्षित गढ हैं । इन समस्त गढों के जतन एवं संवर्धन हेतु, साथ ही इस सांस्कृतिक धरोहर को सुस्थिति में रखने के लिए उस पर अतिक्रमण न हो, इस दृष्टि से सतर्कता रखना आवश्यक है ।

​२. केंद्र एवं राज्य संरक्षित गढ तथा अनुमानतः ३०० असंरक्षित गढ -किलों के स्थानों पर अतिक्रमण होने की बात सरकार के संज्ञान में आई है । वहां कानून एवं व्यवस्था संकट में न पडे, साथ ही वास्तुकला के सौंदर्य को क्षति न पहुंचे, इसके लिए मुख्यमंत्री फडणवीस के निर्देशों के अनुसार जिले के समस्त गढ -दुर्गों पर से अतिक्रमण दूर करने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति स्थापित की जाए, ऐसा उस पत्रक में उल्लेखित था ।

​३. समिति स्थापित होने पर ३१ जनवरी तक समिति द्वारा जिले के गढ-किलों की समीक्षा कर गढ-किलों पर कितने अतिक्रमण हैं ? इसकी सूची सिद्ध (तैयार) कर उसे सरकार को प्रस्तुत करना था । इसके पश्चात १ फरवरी से ३१ मई तक समयबद्ध पद्धति से अतिक्रमण हटाने का कार्य करना तथा समय-समय पर किए गए कार्यों का प्रतिवेदन सरकार को प्रस्तुत करना, साथ ही अतिक्रमण हटाने के उपरांत पुनः उस स्थान पर अतिक्रमण न हो, इसकी सतर्कता समिति द्वारा बरती जाए, ऐसा उल्लेख किया गया था ।

​४. कोल्हापुर जिले का विचार करें तो मूलतः यह समिति ही स्थापित नहीं हुई । इसलिए गढ-किलों पर हुए अतिक्रमणों की सूची सिद्ध करना तथा अतिक्रमण हटाना, ये उसके आगे की बातें हैं ।

समिति की स्थापना हुई ही नहीं !

कोल्हापुर जिला प्रशासन ने इस संदर्भ में कोई भी हलचल नहीं की थी । जनवरी एवं फरवरी मास में इस प्रकार का कोई परिपत्रक आया है, यह भी जिला प्रशासन को ज्ञात नहीं था । इस संदर्भ में अप्रैल मास में ‘सनातन प्रभात’ द्वारा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से पूछताछ करने पर ‘समिति स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है’, ऐसा उत्तर दिया गया । वास्तविकता में अब मई मास समाप्त होनेवाला है, फिर भी इस संदर्भ में यह समिति अभी तक केवल कागजों पर ही है, ऐसा ध्यान में आया है ।

​समिति तत्काल स्थापित कर समय-सीमा निर्धारित करते हुए अतिक्रमण निष्कासित किया जाए ! – हिन्दू जनजागृति समिति

कोल्हापुर जिले में ऐसी समिति स्थापित न होना, यह अत्यंत स्तब्ध करनेवाली तथा क्षोभजनक बात है । छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास के साक्षी रहे गढ-दुर्गों के संरक्षण के विषय में प्रशासन की यह उदासीनता अस्वीकार्य है । सरकार आदेश निकालकर रुक जाती है एवं प्रशासन उसकी उपेक्षा करता है, यह स्थिति गंभीर है । गढ-दुर्ग महाराष्ट्र की अस्मिता के प्रतीक हैं । उन पर से अतिक्रमण हटाने के स्थान पर प्रशासन ने निष्क्रिय भूमिका अपनाई है, जिससे इतिहासप्रेमी तथा शिवभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं । गढ-किलों पर अतिक्रमण ज्ञात होने पर भी उसके लिए समिति भी स्थापित न होना अर्थात प्रशासनिक अधिकारियों का इस अतिक्रमण को एक प्रकार से समर्थन ही है, ऐसा कहा जाए क्या ? अथवा सरकार द्वारा निकाले गए आदेशों को प्रशासन मानता ही नहीं, ऐसा कहा जाए ? अब वर्षा ऋतु आ रही है, तो प्रशासन वास्तव में यह अतिक्रमण कब हटानेवाला है ? अतः आगामी समय में जिला प्रशासन को तत्काल समिति स्थापित कर समय-सीमा में यह अतिक्रमण हटाना चाहिए, अन्यथा समिति इस संदर्भ में तीव्र आंदोलन करेगी, ऐसा संकेत हिन्दू जनजागृति समिति के महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक श्री. सुनील घनवट ने दिया ।

संपादकीय भूमिका

इससे सरकार के आदेश पर इस प्रकार निष्क्रिय रहनेवाला प्रशासन जनता के कार्य कैसे करता होगा, इसकी कल्पना ही न करना श्रेयस्कर है । संबंधित शिथिल कार्यप्रणालीवाले अधिकारियों तथा कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए !