जिन्हें भारत की वास्तविक जानकारी नहीं होती, वही ऐसे प्रश्न पूछते हैं ! – भारत का करारा उत्तर

नॉर्वे में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के समय भारत में पत्रकारिता की स्वतंत्रता तथा मानवाधिकारों को लेकर विदेशी महिला पत्रकार के प्रश्न

ओस्लो (नॉर्वे), नई दिल्ली – यूरोपीय देश नॉर्वे की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे के साथ संयुक्त पत्रकार परिषद की । इस समय पत्रकारों को प्रश्न पूछने की अनुमति नहीं थी । उसी समय स्थानीय पत्रकार हेली लिंग ने प्रधानमंत्री मोदी से प्रश्न पूछने का प्रयास किया ; किंतु पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार प्रश्न पूछने की अनुमति न होने के कारण प्रधानमंत्री मोदी ने कोई उत्तर नहीं दिया । इसके बाद हेली लिंग ने ‘एक्स’ पर आलोचना करते हुए लिखा, “नॉर्वे ‘वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स’ में प्रथम स्थान पर है, जबकि भारत १५७ वें स्थान पर है । पत्रकारों का कार्य सरकार से प्रश्न पूछना होता है ।”


इसके पश्चात भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित पत्रकार वार्ता में जाकर उन्होंने भारतीय अधिकारियों से वाद-विवाद किया । उन्होंने प्रश्न किया, “हम भारत पर विश्वास क्यों करें ? भारत में मानवाधिकारों से संबंधित जो कुछ हो रहा है, क्या वह रोका जाएगा ? प्रधानमंत्री भारतीय मीडिया के कठिन प्रश्नों का उत्तर कब देंगे ?”

इस पर विदेश मंत्रालय में पश्चिमी प्रकरणों के सचिव सिबी जॉर्ज ने उत्तर देते हुए कहा, “बहुत से लोगों को भारत के विशाल स्वरूप तथा यहां की माध्यम व्यवस्था की सही समझ नहीं है । केवल दिल्ली में ही २०० से अधिक समाचार चैनल हैं । अंग्रेजी, हिंदी तथा अनेक भाषाओं में प्रतिदिन हजारों समाचार प्रसारित होते हैं । कुछ लोग अज्ञात स्वयंसेवी संस्थाओं का अहवाल पढ लेते हैं तथा फिर प्रश्न पूछने चले आते हैं ।”

जार्ज ने आगे कहा कि,

१. पहले यह समझना आवश्यक है कि भारत क्या है ? एक देश चार बातों से बनता है – जनसंख्या, सरकार, सार्वभौमिकता तथा भूभाग । भारत ५ सहस्र वर्षों से चली आ रही एक प्राचीन संस्कृति है तथा हमने विश्व को बहुत कुछ प्रदान किया है ।

२. कोरोना महामारी के समय भारत ने स्वयं को विश्व से अलग नहीं किया । भारत ने अन्य देशों की सहायता की तथा अनेक देशों तक वैक्सीन पहुंचाई । यही विश्वास का वास्तविक कारण है ।

३. भारत ने ‘जी-२०’ तथा ‘एआई समिट’ जैसे मंचों पर भी विश्व के महत्वपूर्ण विषयों को उठाया तथा उत्तरदायित्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

४. हम विश्व की जनसंख्या का छठा भाग हैं ; किंतु विश्व की समस्याओं का छठा भाग नहीं हैं । भारत में यदि किसी के अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो उसे न्यायालय जाने का अधिकार है तथा भारत को अपने लोकतंत्र पर गर्व है ।

संपादकीय भूमिका

ऐसे प्रश्न विदेशी पत्रकार कभी डोनाल्ड ट्रम्प के अमेरिका या शी जिनपिंग के चीन से पूछने का साहस क्यों नहीं करते ? उस समय उन्हें किस बात का भय होता है ?