तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने ‘लिट्टे’ के प्रमुख प्रभाकरन को दी श्रद्धांजलि

(लिट्टे का अर्थ ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम’ – तमिल राष्ट्र मुक्ति व्याघ्र)

(बाएंसे) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय और ‘लिट्टे’ के प्रमुख प्रभाकरन

चेन्नई (तमिलनाडु) – भारत के दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी की तथा भारतीय सैनिकों की हत्या करने वाले ‘लिट्टे’ के प्रमुख वी . प्रभाकरन की १८ मई के दिन पुण्यतिथि थी । उसे तमिलनाडु के नये मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने श्रद्धांजलि अर्पित की । वर्ष २००९ में श्रीलंका के मुल्लीवाइक्कल में श्रीलंका की सेना ने प्रभाकरन पर गोलियां चलाकर उसे मार गिराया था । विशेष बात यह है कि भारत में लिट्टे पर प्रतिबंध है । राजीव गांधी कांग्रेस पक्ष के प्रमुख थे । इसी कांग्रेस पक्ष के ५ विधायकों ने जोसेफ विजय की सरकार को समर्थन दिया है । पिछले सप्ताह विजय का शपथ ग्रहण समारोह हुआ था । उसमें लोकसभा के विपक्ष के नेता तथा राजीव गांधी के सुपुत्र राहुल गांधी भी उपस्थित थे।

प्रभाकरन के लिए विजय ने ‘एक्स’ पर श्रद्धांजलि का एक संदेश (पोस्ट) प्रसारित किया। उसमें विजय ने लिखा कि, हम मुल्लीवाइक्कल की स्मृतियों को अपने मन में सदैव संजोकर रखेंगे । समुद्र पार रहने वाले हमारे तमिल बंधु-बांधवों के अधिकारों के लिए हम सदैव उनके साथ खडे रहेंगे ।

‘मुल्लीवाइक्कल स्मरण दिवस’ का महत्त्व क्या है ?

वर्ष १९९१ में लिट्टे ने राजीव गांधी की हत्या करवाई थी । इस प्रकरण में प्रभाकरन मुख्य आरोपी था । वैश्विक स्तर पर विस्तृत तमिल समुदाय तथा भारत में निवास करने वाले तमिल जन १८ मई को ‘मुल्लीवाइक्कल स्मरण दिवस’ अर्थात ‘तमिल नरसंहार स्मरण दिवस’ के रूप में मनाते हैं । वर्ष २००९ में श्रीलंका का गृहयुद्ध समाप्त हुआ । इस दिन मृत्यु को प्राप्त हुए सहस्रों तमिल नागरिकों का स्मरण किया जाता है । मुल्लीवाइक्कल इस तटीय ग्राम पर श्रीलंका की सेना ने अंतिम भीषण प्रहार किया था। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार युद्ध के इस अंतिम चरण में लगभग ४० से ७० सहस्र तमिल नागरिकों ने अपने प्राण गंवाए थे । श्रीलंका की सेना ने नागरिकों पर बडे स्तर पर अत्याचार किए थे । इसलिए यह दिन ‘मुल्लीवाइक्कल स्मरण दिन’ के रूप में तमिल हिन्दू मनाते हैं ।

संपादकीय भूमिका

  • राजीव गांधी की हत्या करने वाले ‘लिट्टे’ संगठन के प्रमुख को श्रद्धांजलि देना, क्या विजय की सरकार को समर्थन देने वाली कांग्रेस को स्वीकार्य है ?
  • स्वातन्त्र्यवीर सावरकर पर टिप्पणी करने वाली कांग्रेस राजीव गांधी की हत्या करने वालों का मात्र राजनीतिक लाभ के लिए विरोध नहीं करती, इसे ध्यान में रखिए ! इससे यही कहना पडेगा कि कांग्रेस का गांधी परिवार के प्रति प्रेम मात्र पाखंड है !