Sanatan Sanstha Press Meet : भारत की रक्षा हेतु मुंबई में १७ मई को ‘ श्री राजमातंगी महायज्ञ ’ !

  • सनातन संस्था की ओर से मुंबई में पत्रकार परिषद

  •  ५ सहस्र श्रद्धालु होंगे उपस्थित !

श्री राजमातंगी महायज्ञ : मुंबई में सनातन संस्था का भव्य आयोजन

बाएं से श्री . श्रेयस पिसोळकर, श्री . चेतन राजहंस, संबोधित करते हुए श्री . अभय वर्तक तथा श्री . कैलाश पाटिल ।

मुंबई, १४ मई ( वार्ता ) – संपूर्ण विश्व पर वर्तमान में तृतीय विश्वयुद्ध के काले बादल मंडरा रहे हैं । ऐसी स्थिति में केवल राजनीतिक अथवा बौद्धिक स्तर के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं । राष्ट्र को आध्यात्मिक अधिष्ठान की महती आवश्यकता है । इसी उदात्त उद्देश्य से, भारत को अभेद्य आध्यात्मिक सुरक्षा कवच प्राप्त हो तथा देश की सर्वांगीण प्रगति होकर पुनः एक बार ‘ रामराज्य ’ का उदय हो, इस संकल्प की सिद्धि हेतु सनातन संस्था की ओर से मुंबई में ‘ श्री राजमातंगी महायज्ञ ’ का आयोजन किया गया है । १७ मई को प्रभादेवी स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर के पीछे, नर्दुल्ला टैंक मैदान में दोपहर ३.३० से सायंकाल ७ .३० की अवधि में यह यज्ञ अनुष्ठान अत्यंत मंगलमय वातावरण में संपन्न होगा । यह जानकारी सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री . अभय वर्तक ने १४ मई को मुंबई मराठी पत्रकार संघ में आयोजित पत्रकार परिषद में दी ।

इस अवसर पर संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री . चेतन राजहंस , पुरोहित एवं ज्योतिर्विद श्री . श्रेयस पिसोळकर तथा महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के नवी मुंबई समन्वयक श्री . कैलाश पाटिल उपस्थित थे । इस समय यह रेखांकित किया गया कि यह महायज्ञ मात्र एक धार्मिक विधि नहीं, अपितु राष्ट्र रक्षा का एक आध्यात्मिक संघर्ष है । समस्त धर्मप्रेमी हिन्दुओं से सपरिवार इस समारोह में उपस्थित रहने का आवाहन किया गया है ।

यज्ञ का आध्यात्मिक महत्त्व स्पष्ट करते हुए श्री . अभय वर्तक ने कहा …

१ . आदिशक्ति देवी सती के क्रोध से प्रकट हुई दशमहाविद्याओं में श्री राजमातंगी देवी का स्थान अनन्यसाधारण है । श्री राजमातंगी देवी को आदिशक्ति की ‘ प्रधानमंत्री ’ अर्थात् मुख्य परामर्शदाता माना जाता है । शत्रु पर विजय तथा प्रतिकूल परिस्थितियों पर नियंत्रण प्राप्त करने हेतु इस देवी की उपासना फलदायी सिद्ध होती है ।

२ . त्रेतायुग में प्रभु श्री राम के अवतार के समय भी श्री राजमातंगी देवी का तत्त्व कार्यरत था । इसी कारण आदर्श रामराज्य की स्थापना संभव हो सकी । वर्तमान काल में भी वैसी ही दैवीय शक्ति के आशीर्वाद से भारत की रक्षा हो, यही इस यज्ञ का मुख्य उद्देश्य है ।

३ . सनातन संस्था ने अब तक ७५० से अधिक यज्ञ-अनुष्ठान संपन्न किए हैं । मुंबई के इस यज्ञ समारोह में विभिन्न क्षेत्रों के संत-महंत, राज्य सरकार के मंत्री, हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के पदाधिकारी, विचारक, अधिवक्ता एवं उद्यमियों सहित ५ सहस्र श्रद्धालु उपस्थित रहेंगे ।

४ . सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ . जयंत आठवले ने जिस मुंबापुरी ( मुंबई ) से धर्मकार्य का श्रीगणेश किया था, उसी नगरी में होने वाला यह महायज्ञ राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम सिद्ध होगा ।

सोरटी सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अंशों के होंगे दर्शन ! – चेतन राजहंस, राष्ट्रीय प्रवक्ता

इस महायज्ञ का सबसे बडा आकर्षण १ सहस्र वर्ष पूर्व आक्रांता महमूद गजनवी द्वारा भग्न किए गए सोरटी सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अंशों का दर्शन है । इतिहास की साक्ष देने वाले ये पवित्र अवशेष यहां दर्शनार्थ रखे जाएंगे । श्रद्धालुओं के लिए यह एक दुर्लभ अवसर होगा ।
श्री . कैलाश पाटिल ने सूचित किया कि ‘ इस यज्ञ में मुंबई, ठाणे, रायगढ तथा पालघर जनपदों के अनेक मंदिरों के न्यासी ( ट्रस्टी ) एवं पुजारी सम्मिलित होंगे ’ ।
श्री . श्रेयस पिसोळकर ने जानकारी दी कि ‘ यज्ञ का प्रारंभ श्री गणेश आवाहन, पुण्याहवाचन एवं महासंकल्प से होगा । श्री राजमातंगी देवी के मूलमंत्रों के घोष के साथ आहुतियां अर्पित की जाएंगी । यज्ञ का पौरोहित्य दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध वेदमूर्ति श्री . अरुण गुरुजी करेंगे ’ ।