नए आदेश में कलाई पर धागा, रुद्राक्ष एवं जनेऊ को अनुमति, जबकि भगवा शॉल पर प्रतिबंध
वर्ष २०२२ में तत्कालीन भाजपा सरकार ने हिजाब पर लगाया था प्रतिबंध
(हिजाब अर्थात मुस्लिम महिलाओं द्वारा सिर एवं गर्दन ढकनेवाला वस्त्र)
बेंगलुरु (कर्नाटक) — कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने विद्यालयों एवं कॉलेज में हिजाब पर प्रतिबंध लगाने वाले वर्ष २०२२ के निर्णय को वापस ले लिया है । नए आदेश के अनुसार विद्यार्थियों को हिजाब के साथ-साथ कलावा (कलाई का धागा), रुद्राक्ष, फेटा एवं जनेऊ पहनने की भी अनुमति दी गई है; यद्यपि सरकार ने स्पष्ट किया है कि भगवा शॉल पहनने की अनुमति नहीं होगी । कर्नाटक की तत्कालीन भाजपा सरकार ने फरवरी २०२२ में सरकारी कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए निर्धारित यूनिफॉर्म का पालन अनिवार्य किया था । इसी आदेश के उपरांत कई सरकारी शिक्षण संस्थानों में हिजाब पहनकर कक्षा में प्रवेश करने पर रोक लगाई गई थी ।
🚨 Karnataka Congress government withdraws the 2022 hijab ban in schools imposed during the BJP regime.
The new order allows wrist threads, Rudraksha beads, and Janve (Janivara), but still bans saffron shawls.
If Congress can reverse the previous government’s decision after… pic.twitter.com/5Txs1kIH3d
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) May 14, 2026
सरकार ने कहा कि यह निर्णय बच्चों के हित को ध्यान में रखकर लिया गया है तथा शिक्षा में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए । आदेश में यह भी कहा गया कि ‘भगवा शॉल धार्मिक प्रतीकों की श्रेणी में नहीं आती, इसलिए विद्यालयों एवं कॉलेजों में उसे अनुमति नहीं दी जाएगी ।’
‘यदि हिजाब पहनने की अनुमति है, तो भगवा शॉल की भी अनुमति मिलनी चाहिए !’ — निर्दलीय विधायक बसनगौडा पाटिल यतनाल

विधायक बसनगौडा पाटिल यतनाल ने मांग की है कि यदि विद्यालयों में हिजाब पहनने की अनुमति दी जा सकती है, तो हिन्दू विद्यार्थियों को भी भगवा शॉल पहनने की अनुमति दी जानी चाहिए । उन्होंने कहा कि विद्यालय की छात्राओं को हिजाब पहनने की अनुमति होनी चाहिए या नहीं, यह प्रकरण अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है । ऐसे में कर्नाटक सरकार का यह मत अल्पसंख्यक वोट बैंक सुरक्षित करने का एक और प्रयास है ।
यतनाल ने आगे कहा कि वे स्वयं हिन्दू विद्यार्थियों को भगवा शॉल उपलब्ध कराएंगे । साथ ही सभी विद्यालयों तथा कॉलेजों में श्री गणपति एवं श्री सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर प्रतिदिन पूजा कराने की व्यवस्था भी करेंगे ।

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