महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय की ओर से ‘उपचारों में अध्यात्म की भूमिका’ विषय पर शोध का प्रस्तुतीकरण

शिरोडा (गोवा) – ‘किसी भी प्रकार की बीमारी पर विजय प्राप्त करने हेतु शारीरिक उपचारों के साथ आध्यात्मिक स्तर के उपचार करना भी अत्यंत आवश्यक है’, ऐसा प्रतिपादन महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के शोध कार्य समूह के सदस्य श्री. शॉर्न क्लार्क (आध्यात्मिक स्तर ६७ प्रतिशत) एवं श्रीमती श्वेता क्लार्क ने किया । शिरोडा के ‘गोमंतक आयुर्वेद महाविद्यालय’ एवं शोध कार्य केंद्र में ‘उपचारों में अध्यात्म की भूमिका’ विषय पर आयोजित अतिथि व्याख्यान में ये दोनों ऐसा बोल रहे थे ।
इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नीलेश कोरडे एवं ‘गोवा काउंसिल ऑफ आयुर्वेदिक’ की अध्यक्षा डॉ. स्नेहा भागवत के साथ १०० स्नातकोत्तर छात्र एवं आयुर्वेद विषय के प्राध्यापक सक्रिय सहभागी थे । इस अवसर पर महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के शोध कार्य दल ने उपस्थित छात्रों एवं प्राध्यापकों के सामने आधुनिक ‘ऑरा’ एवं ऊर्जा स्कैनर के माध्यम से प्राप्त निष्कर्ष रखे ।
निष्कर्ष : शोध के निष्कर्षों के विषय में श्री. शॉर्न क्लार्क एवं श्रीमती श्वेता क्लार्क ने बताया कि अपने धर्म के अनुसार ईश्वर का नामजप करना, १५ मिनट नमक के पानी का उपचार, स्वभावदोषों पर विजय प्राप्त करना तथा ताजा पकाया हुआ शाकाहारी सात्त्विक अन्न सेवन करना आदि उपचार सभी आध्यात्मिक समस्याओं पर (चिकित्सकीय समस्याओं सहित) प्रभावी आत्मोपचार साधन सिद्ध हो सकते हैं ।
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