हिन्दू राष्ट्र निश्चित रूप से बनेगा ! – Mahabharat Actors

‘महाभारत’ नाट्य श्रृंखला के कलाकारों की पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सभा में गर्जना

(डावीकडून) अभिनेते पुनीत इस्सर, अभिनेते गजेंद्र चौहान व पंडित धीरेंद्रकृष्ण शास्त्री

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) – यहां आयोजित बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के प्रवचन कार्यक्रम के समय बी.आर. चोपड़ा के प्रसिद्ध ‘महाभारत’ धारावाहिक के कलाकार उपस्थित थे । उन्होंने मंच से हिन्दू धर्म की रक्षा एवं देश को ‘हिन्दू राष्ट्र’ बनाने का आहवान किया । उनके इन आक्रामक व्यक्तव्यों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है ।

धर्मांतरण से सावधान रहें ! – पुनीत इस्सर (दुर्योधन)

‘महाभारत’ में ‘दुर्योधन’ की भूमिका निभाने वाले अभिनेता पुनीत इस्सर ने कहा, “ऐसी सभाओं को देखकर लगता है कि हमारा हिन्दू समाज अब जागृत हो गया है एवं हिन्दू राष्ट्र निश्चित रूप से बनेगा । मैं अपनी माताओं, बहनों एवं भाइयों से कहना चाहता हूं कि वे अपने बच्चों को धर्म के संबंध में ज्ञान दें । आसपास के लोगों से सतर्क रहें । जिस प्रकार छल-बल पूर्वक धर्मांतरण किया जा रहा है, पुत्रियों एवं बहुओं को भ्रमित कर उनका धर्म परिवर्तन किया जा रहा है, उससे सावधान रहें । किसी भी परिस्थिति में यह नहीं होना चाहिए ।” साथ ही उन्होंने ‘शास्त्र’ के साथ ‘शस्त्र’ विद्या की आवश्यकता पर भी जोर देते हुए सभी से व्यायाम पर ध्यान देने का आह्वान किया ।

धर्म के विरोध में षड्यंत्र करने वालों का विनाश निश्चित है ! – गजेंद्र चौहान (युधिष्ठिर)

‘महाभारत’ में ‘युधिष्ठिर’ की भूमिका निर्वहन करने वाले गजेंद्र चौहान ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “महाभारत नाट्य श्रृंखला सभी ने देखा है, किन्तु हमने उसे (अभिनय के माध्यम से) अपने जीवन में उतारा है । हमने उन पापी लोगों का नाश किया, जो धर्म के विरोध में थे । धर्म के विरोध में काम करने वालों का विनाश होना निश्चित है । हमारे लिए राष्ट्रहित से श्रेष्ठ कुछ भी नहीं है ।”

धर्म पर संकट आने पर तटस्थ न रहें, उसके संरक्षण के लिए अग्रसर हों ! – नितीश भारद्वाज (श्रीकृष्ण)

अभिनेते नितीश भारद्वाज

नाट्य श्रृंखला में श्रीकृष्ण की भूमिका चरितार्थ करने वाले नितीश भारद्वाज ने भगवद्गीता के श्लोकों का आधार लेते हुए धर्म रक्षा पर विचार व्यक्त किए । उन्होंने समाज को प्रेम एवं एकता का संदेश दिया, किन्तु साथ ही यह भी कहा कि धर्म पर संकट आने पर तटस्थ न रहकर उसके संरक्षण के लिए चट्टान बन कर खडा होना नितांत आवश्यक है ।