(और इनकी सुनिए…) इच्छा हो, तो अफगानिस्तान के साथ हम चर्चा करवा सकते हैं ! : Iran’s Foreign Minister Abbas Araqchi

ईरान-अमेरिका युद्ध में मध्यस्थता के लिए अगुवाई करनेवाले पाकिस्तान को ईरान के विदेश मंत्री का तमाचा !

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची

तेहरान (ईरान) – यदि पाकिस्तान की इच्छा हो, तो अफगानिस्तान से उसके चल रहे संघर्ष में ईरान मध्यस्थ बनकर उसकी सहायता कर सकता है, ऐसे शब्दों में ईरान ने अमेरिका के साथ युद्ध में मध्यस्थता करनेवाले पाकिस्तान पर कटाक्ष किया है ।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि, ‘यदि दोनों देशों (पाकिस्तान-अफगानिस्तान) की इच्छा हो, तो ईरान उनके मध्य के मतभेद दूर करने के लिए सहायता करने में समर्थ है ।’ पाकिस्तान के ही वाक्यों को उन पर पलटते हुए अराघची बोले कि, ‘किसी भी समस्या के निराकरण के लिए चर्चा एवं प्रादेशिक सहयोग, यही एकमात्र मार्ग है । तनाव बढने से रोकने के लिए दोनों देशों को कूटनीति का मार्ग अपनाना चाहिए ।’

पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान के बीच बिगडे हुए सम्बन्ध !

वर्ष २०२१ में तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर नियन्त्रण प्राप्त करने के पश्चात पाकिस्तान के साथ उनका तनाव बढ गया है । पाकिस्तान, तालिबान को स्वयं के हाथ की कठपुतली बनाकर उनका उपयोग भारत के विरुद्ध करना चाहता था; परन्तु तालिबान उनके जाल में फंसने के स्थान पर स्वयं की स्वतन्त्र नीति से चलने लगा । जिससे दोनों के मध्य सम्बन्ध बिगड गए । पाकिस्तान का ऐसा आरोप है कि, अफगानिस्तान सरकार (अर्थात तालिबान) उनके यहां सक्रिय तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) इस आतंकवादी संगठन के आतंकवादियों को आश्रय देती है । इसी बात को आधार बनाकर पाकिस्तान बार-बार अफगानिस्तान में बमबारी करता रहता है । इससे अफगानिस्तान पर राज्य करनेवाले तालिबान से उनमें शत्रुता निर्माण हुई है । इसी कारण दोनों के मध्य सीमा पर मुठभेड चलती रहती है ।

संपादकीय भूमिका

यदि पाकिस्तान की इच्छा हो, तो अफगानिस्तान से उसके चल रहे संघर्ष में ईरान मध्यस्थ बनकर उसकी सहायता कर सकता है, ऐसे शब्दों में ईरान ने अमेरिका के साथ युद्ध में मध्यस्थता करनेवाले पाकिस्तान पर कटाक्ष किया है ।