Lenskart Anti-Hinduism : दुकानों में हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियां तथा चित्र कर्मचारियों के पैरों के पास रखे गए !

‘लेन्सकार्ट’ का नया हिन्दू-विरोध उजागर

नई दिल्ली – चश्मों की बिक्री करने वाली कंपनी ‘लेन्सकार्ट’ ने अपने हिन्दू कर्मचारियों को धार्मिक प्रतीकों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के प्रकरण में क्षमा याचना की थी ; तथापि अब एक नया प्रकरण सामने आया है । सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित एक वीडियो में हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता लेन्सकार्ट के दुकान-कर्मचारियों से इस विषय में प्रश्न करते हुए दिखाई दे रहे हैं । इस वीडियो में कुछ स्थानों पर छोटे मंदिरों जैसी व्यवस्था अथवा हिन्दू देवी-देवताओं के चित्र काउंटर के नीचे अलमारी में छिपाकर रखे जाने या कर्मचारियों के पैरों के पास रखने का दावा किया गया है । इसके कारण हिन्दुओं में आक्रोश की लहर उत्पन्न हो गई है तथा पुनः बहिष्कार की मांग उठने लगी है ।

इस वीडियो में कुछ कार्यकर्ता दुकान में प्रवेश कर काउंटर के नीचे रखी अलमारी में रखी मूर्तियों तथा चित्रों की खोज करते हुए दिखाई देते हैं । उस समय एक भयभीत कर्मचारी भी दिखाई देता है तथा कार्यकर्ता यह मांग करते हैं कि इन देवताओं को ‘सम्मानपूर्वक ऊंचे तथा स्पष्ट दिखाई देने वाले स्थान पर रखा जाए’। वे यह प्रश्न भी करते हैं कि ‘क्या संस्थान की नीति में ऐसा कोई प्रावधान है ?’ कुछ लोगों ने यह भी प्रश्न उठाया है कि ‘क्या हिन्दू देवी-देवताओं को जानबूझकर पैरों के पास तथा दृष्टि से दूर रखा जा रहा है ?’ लेन्सकार्ट की अन्य शाखाओं में भी ऐसे ही आरोप सामने आने का दावा किया जा रहा है तथा सामाजिक माध्यमों पर यह भी कहा जा रहा है कि प्रबंधकों द्वारा ऐसी वस्तुओं को खुलकर प्रदर्शित न करने के निर्देश दिए गए हैं । अनेक लोगों ने कंपनी के मालिक पियूष बंसल को ‘टैग’ करते हुए यह प्रश्न किया है कि ‘आपके नेतृत्व में वास्तव में क्या हो रहा है ?’ तथा हिन्दू भागधारकों तथा ग्राहकों से इस संस्थान के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार करने का आह्वान किया है । इन नए वीडियो के संबंध में ‘लेन्सकार्ट’ की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है ।

संपादकीय भूमिका

इससे ‘लेन्सकार्ट’ की मानसिकता हिन्दू-विरोधी होने का स्पष्ट संकेत मिलता है ! ऐसे संस्थान का हिन्दुओं द्वारा स्थायी बहिष्कार ही उचित दंड सिद्ध होगा !