छत्रपति संभाजीनगर : अम्बेडकर जयंती की शोभायात्रा में क्रूरकर्मी औरंगजेब के फलक लहराए गए ।

  • धर्मांध युवक का औरंगजेब के चित्र के साथ नृत्य करता हुआ वीडियो प्रसारित ।

  • हिन्दूद्वेषियों के कृत्य के कारण शहर में क्षोभ की लहर ।

छत्रपति संभाजीनगर – भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में यहां निकाली गई शोभायात्रा में एक धर्मांध युवक द्वारा क्रूरकर्मी औरंगजेब का फलक लहराने की क्षोभजनक घटना सामने आई है । इस युवक द्वारा इस कृत्य का वीडियो सामाजिक माध्यमों में प्रसारित किए जाने से शहर में इसके प्रति तीव्र क्षोभ की लहर उमडी है ।

उपमहापौर राजेंद्र जंजाळ ने अपराध पंजीकृत करने की मांग की ।

इस गंभीर प्रकरण पर उपमहापौर राजेंद्र जंजाळ ने आक्रामक भूमिका निभाई है ।

उन्होंने कहा कि औरंगजेब कोई महापुरुष नहीं है, अपितु वह एक आक्रांता था । महामानव की जयंती जैसे पवित्र प्रसंग के समय में ऐसे क्रूरकर्मी के फलक लहराना तथा उसकी वीडियो प्रसारित करना अत्यंत निंदनीय है । संबंधित आरोपी के विरुद्ध तत्काल अपराध पंजीकृत करने के लिए मैं पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार से मिलूंगा ।

पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने इस कृत्य का समर्थन किया ।

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए मुसलमान राजनीतिक दल एम्.आई.आई.एम्. के (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन – अखिल भारतीय हिंदु विरोधीएकता संघ) नेता तथा पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने एकप्रकार से इस कृत्य का समर्थन करते हुए विचित्र तर्क रखा । जलील ने कहा कि संविधान ने प्रत्येक व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की है, इसलिए कोई युवक ऐसा चित्र लेकर गया हो तो उसका क्या अपराध है ? उपमहापौर जंजाळ इस पर किस अनुच्छेद के अंतर्गत अपराध पंजीकृत किया जा सकता है, यह स्पष्ट करें । (जलील जैसे नेता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का आधार लेकर कैसे क्रूरकर्मी आक्रांताओं का महिमामंडन कर सकते हैं ? औरंगजेब का चित्र लहरानेवालों पर कठोर कार्यवाही होनी ही चाहिए, जिससे भविष्य में कोई ऐसा साहस नहीं करेगा – संपादक) हिन्दुत्वनिष्ठ यह मत व्यक्त कर रहे हैं कि जलील के इस वक्तव्य के कारण औरंगजेब का महिमामंडन करनेवालों को बल मिलता है ।

संपादकीय भूमिका

  • हिन्दू मंदिरों का विध्वंस करनेवाले हिन्दूद्वेषी औरंगजेब का महिमामंडन करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है, अपितु वह जानबूझकर सामाजिक सौहार्द बिगाडने का कृत्य है । क्या पुलिस प्रशासन ऐसे लोगों को कारागृह में डालने का साहस दिखाएगा ?
  • छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा अफजलखान का पेट फाडकर उसकी आंते निकालते हुए चित्र लहराना जैसे मुसलमानों को रुचिकर नहीं लगेगा वैसे ही हिन्दू मंदिरों का विध्वंस करनेवाले हिन्दूद्वेषी औरंगजेब का चित्र लहराना हिन्दू सहन नहीं करेंगे, इसे हिन्दुओं द्वारा डंके की चोट पर बता देना चाहिए ।
  • छत्रपति शिवाजी महाराज का अफजलखान की अंतड़ियां बाहर निकालते समय का चित्र लहराने की अनुमति पुलिस प्रशासन नहीं देता । उसी प्रकार क्रूरकर्मी औरंगजेब का चित्र लहराने की अनुमति लेने के लिए नहीं कहते, इसे ध्यान में लें ।