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प्रयागराज – इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है । १४ मार्च २०२५ को उनके दिल्ली स्थित घर में लगी आग के बाद ५०० रुपये की नोटों के जले हुए बंडल पाए गए थे । इस विवाद के कारण उनका दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरण किया गया था । उनके विरुद्ध चल रही जांच पूरी होने तक उन्हें न्यायिक कार्यों से दूर रखा गया था ।
नकद राशि की घटना में नाम सामने आने के बाद न्यायाधीश वर्मा के विरुद्ध लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था । न्यायाधीश वर्मा ने इस महाभियोग प्रस्ताव को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी । ६ जनवरी २०२६ को सर्वोच्च न्यायालय में इस याचिका पर सुनवाई शुरू हुई । दो दिन की सुनवाई के बाद सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश दीपांकर दत्ता तथा न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने ८ जनवरी को इस याचिका पर निर्णय सुरक्षित रख लिया था । हालांकि, खंडपीठ ने न्यायाधीश वर्मा को संसदीय समिति के समक्ष उत्तर देने की समयसीमा बढाने से माना कर दिया था ।
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