Farsa Wale Baba Murder : गोतस्करों का पीछा कर रहे गोरक्षक फरसा वाले बाबा को ट्रक ने कुचला

  • मथुरा (उत्तरप्रदेश) की घटना

  • समर्थकों द्वारा महामार्ग पर पथराव, पुलिस वाहनों की तोडफोड

‘फरसा वाले बाबा’

मथुरा (उत्तर प्रदेश) – यहां चंद्रशेखर उपनाम ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से विख्यात गोरक्षक की ट्रक से कुचले जाने के कारण मृत्यु हो गई । गोरक्षक बाबा ने प्रातः ४ बजे के समय मथुरा-आगरा महामार्ग पर एक कंटेनर को रोका था । उन्हें इसमें गोतस्करी होने का संदेह था । पुलिस के अनुसार, ‘उस समय कंटेनर के पीछे से आ रहे एक ट्रक ने बाबा की दोपहिया को कुचल दिया, जिससे उनकी मृत्यु हुई’; परंतु बाबा के समर्थकों ने आरोप लगाया है कि गोतस्करों ने उनकी हत्या की है । इस घटना के पश्चात समर्थकों ने उग्र प्रदर्शन एवं हिंसा की । प्रदर्शनकारियों ने मार्ग अवरुद्ध कर पुलिस पर पथराव किया, जिससे वहां कई घंटों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही । तत्पश्चात पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण प्राप्त किया । इस हिंसा में पुलिस के ५ – ६ वाहनों की तोडफोड की गई । परिस्थिति को अनियंत्रित होते देख पुलिस ने लाठीचार्ज किया तथा अश्रु गैस के गोले छोडे ।

घटनाक्रम क्या था ?

बरसाना के अजानौख ग्राम में गौशाला का संचालन करने वाले फरसा वाले बाबा को सूचना प्राप्त हुई थी कि कोसी राष्ट्रीय महामार्ग पर एक ट्रक के माध्यम से पशुओं का अवैध परिवहन किया जा रहा है । यह सूचना मिलते ही बाबा २ युवकों के साथ दोपहिया से निकले । जब वे महामार्ग के बाथन गेट क्षेत्र में पहुंचे, तब उन्हें गोतस्करों का एक ट्रक दिखा । जब बाबा ने ट्रक को रोकने का प्रयास किया, तब तस्करों ने गति बढा दी । लगभग ७ किलोमीटर तक पीछा करने के पश्चात बाबा कोतवान चौकी क्षेत्र के नवपुर ग्राम में पहुंचे । उन्होंने ट्रक के सामने आकर उसे रोका । समर्थकों का आरोप है कि जब वे दोपहिया से नीचे उतरे, तब ट्रक चालक ने ट्रक चलाकर उन्हें कुचल दिया । पुलिस इस प्रकरण की जांच कर रही है कि बाबा की मृत्यु वास्तव में कैसे हुई । इस घटना के समय एक गोतस्कर को पकडा गया है, जबकि उसके २ साथी भागने में सफल रहे ।

फरसा वाले बाबा

फरसा वाले बाबा गोरक्षक के रूप में प्रसिद्ध थे । वे सदैव अपने हाथ में परशु (कुल्हाडी ) रखते थे, जिसके कारण उन्हें ‘फरसा वाले बाबा’ का उपनाम प्राप्त हुआ था ।

संपादकीय भूमिका 

  • देश के अनेक राज्यों में गोहत्या निषेध अधिनियम लागू किए गए हैं; तथापि पुलिस एवं प्रशासन की निष्क्रियता तथा भ्रष्टाचार के कारण गोहत्याएं पूर्णतः रुकी नहीं हैं । इसी कारण गोरक्षकों को गोहत्या रोकने हेतु रात्रि के समय सडकों पर उतरकर कार्य करना पड रहा है तथा इस प्रक्रिया में उनकी हत्याएं हो रही हैं । पुलिस एवं प्रशासन के लिए यह अत्यंत लज्जास्पद विषय है !
  • मात्र कानून बनाने से अपराध नहीं रुकते, अपितु उनका कठोर क्रियान्वयन आवश्यक होता है । गोहत्या एवं धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने के पश्चात भी यदि उनका कडाई से पालन नहीं होता, तो उनकी उपयोगिता क्या है ?