विधानपरिषद में मिशनरियों एवं जिहादियों द्वारा किया जा रहा बुद्धिभ्रम किया उजागर !

मुंबई, १८ मार्च (संवाददाता) : ‘धर्म’ मनुष्य को जोडने के लिए होता है, तोडने के लिए नहीं !; परंतु वर्तमान समय में धर्म का उपयोग दबाव बनाने, द्रोह करने तथा लालच देने के लिए किया जा रहा है । आदिवासी एवं महापालियों में शिक्षा ले रहे गरीब एवं असहाय बच्चों को लक्ष्य बनाकार उनके आस्था के केंद्रों के विषय में बुद्धिभ्रम किया जा रहा है । धर्मांतरण का षड्यंत्र एवं हिन्दू लडकियों के साथ द्रोह की घटनाएं रोकने के लिए धर्मांतरणविरोधी कानून बनना ही चाहिए, ऐसा सुस्पष्ट प्रतिपादन शिवसेना की विधायिका मनीषा कायंदे ने १७ मार्च को विधानपरिषद में किया ।
धर्मांतरणविरोधी कानून विधेयक पर चल रही चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने ईसाई मिशनरियों एवं ‘लव जिहाद’ के माध्यम से हिन्दू लडकियों के साथ हो रहे द्रोह पर प्रहार किया ।
हिन्दुओं की देवताओं के विषय में बुद्धिभ्रम कर द्रोह !
विधायिका कायंदे ने मिशनरियों की कार्यपद्धति पर प्रहार करते हुए कहा कि, ‘तुम्हारा भगवान तुम्हें क्या देता है ? क्या वह तुम्हें भोजन उपलब्ध कराता है ?’, ऐसे प्रश्न पूछकर हिन्दुओं के मन में भ्रम उत्पन्न किया जाता है । कुछ स्थानों पर हिन्दुओं के देवी का स्वरूप देकर वास्तव में दूसरे ही धर्म की (ईसाई) मूर्तियों की पूजा करने पर बाध्य किया जाता है । रविवार के दिन गाने बजाकर विशिष्ट धर्म का (ईसाई) प्रचार किया जाता है । विल्सन महाविद्यालय के बाहर विशिष्ट धर्म के (ईसाई) पत्रकें बांटकर युवा पीढी को आकर्षित करने का प्रयास किया जाता है ।
‘लव जिहाद’चलाकर हिन्दू लडकियों के साथ हो रहा है द्रोह !
‘लव्ह जिहाद’ के द्वारा हिन्दू लडकियों के साथ होनेवाले द्रोह के संदर्भ में उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दू लडकी को स्वयं का दक्ष वैद्य नाम बतानेवाले धर्मांध का वास्तविक नाम ‘इक्बाल शेख’ था । धर्मांध साहिल लष्कर ने ‘लव जिहाद’ के द्वारा बंगाल की ८-९ हिन्दू लडकियों के साथ द्रोह किया है । विशिष्ट समाज के (इस्लाम) जिम ट्रेनर हिन्दू लडकियों से निकटता बनाकर उन्हें धर्मांतरण के लिए प्रेरित करते हैं । १८ वर्ष की आयु होते हुए भी लडकियों को अनेक बार इस जाल के संबंध में संपूर्ण ज्ञात नहीं होता ।
धर्मांतरणविरोधी कानून का भय होना ही चाहिए !
विधायिका मनीषा कायंदे ने कहा, ‘‘जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्मपरिवर्तन करता है, तो वह बात अलग है; परंतु यहां लालच देकर तथा बुद्धिभ्रम कर द्रोह किया जाता है । जब तक इन लोगों में मन में कानून का भय नहीं बैठेगा, तब तक धर्मांतरण की घटनाएं नहीं रूकेंगी । जैसे शिरस्त्राण (हेल्मेट) न पहनने पर आर्थिक दंड का भय होता है, वैसा ही भय धर्मांतरण करनेवाले तस्करों में उत्पन्न होना चाहिए । इस कानून में ६० दिन का समय दिया गया है; जिससे परिवार के लोग उनके लडकियों को समझा सकेंगे । मैं इस महत्त्वपूर्ण कानून का स्वागत करती हूं ।’’
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