सांसद प्रा. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी ने राज्यसभा में की प्रभावी मांग

मुंबई – महाराष्ट्र के आराध्य देव तथा वारकरी संप्रदाय के प्राण स्वरूप संत श्री ज्ञानोबा माऊली का ‘संत श्री ज्ञानेश्वर महाराज संजीवन समाधी मंदिर’ आळंदी में स्थित है । इस ‘पवित्र आळंदी नगरी’ को केंद्र सरकार की ‘मंदिर नगर विकास योजना’ में सम्मिलित किया जाए, ऐसी प्रभावी मांग भारतीय जनता पार्टी की सांसद प्रा. डॉ. (श्रीमती) मेधा कुलकर्णी ने संसद में की । कुलकर्णी जी ने राज्यसभा में ‘विशेष उल्लेख’ के माध्यम से कहा कि, “यदि केंद्र सरकार की आगामी नीतिगत योजना का लाभ आळंदी को प्राप्त होता है, तो इस तीर्थक्षेत्र का कायाकल्प होगा तथा श्रद्धालुओं को वैश्विक स्तर की सुविधाएं उपलब्ध होंगी ।”
संसद में प्रस्तुत मुख्य सूत्र !
आधारभूत संरचनाओं पर बढ़ते भार को कम करने की आवश्यकता !
आळंदी देश के अत्यंत पूजनीय तीर्थक्षेत्रों में से एक है । प्रतिवर्ष आषाढ़ी तथा कार्तिकी वारी के अवसर पर यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं । इस अपार जनसमूह के कारण स्थानीय नागरिक सुविधाओं, स्वच्छता, यातायात एवं पर्यावरणीय संसाधनों पर अत्यधिक भार पड़ता है । इस भार को कम करने हेतु सुनियोजित विकास की नितांत आवश्यकता है ।
अनियोजित शहरीकरण की चुनौती !
राष्ट्रीय स्तर पर आध्यात्मिक महत्त्व होने के उपरांत भी आज आळंदी को अनियोजित शहरीकरण तथा अपर्याप्त आधारभूत संरचनाओं का सामना करना पड रहा है । केंद्रीय बजट में ‘टियर-२’ नगरों एवं मंदिर नगरों के विकास पर जो बल दिया गया है, वह इन समस्याओं के समाधान हेतु सर्वोत्तम अवसर है । (‘टियर-२’ नगर भारत के वे तीव्र गति से विकसित होने वाले नगर हैं, जिनकी जनसंख्या सामान्यतः १ से ५ लाख के मध्य होती है । ये नगर महानगरों के पश्चात द्वितीय श्रेणी में आते हैं ।)

इंद्रायणी नदी का प्रदूषण तथा पुनरोद्धार
आळंदी की पहचान पवित्र इंद्रायणी नदी से अभिन्न रूप से जुड़ी है । वर्तमान स्थिति में नदी के प्रदूषण को रोकना तथा उसका पुनर्जीवित करना अत्यंत आवश्यक है । ‘मंदिर नगर’ (टेंपल टाउन) का स्तर प्राप्त होने पर ‘रिवरफ्रंट डेवलपमेंट’ (नदी तट विकास) तथा बाढ़ नियंत्रण हेतु एकीकृत नियोजन करना संभव होगा ।
‘मंदिर नगर’ का स्थान प्राप्त होने से मिलने वाले लाभ !
१. श्रद्धालुओं हेतु सुविधाएं : स्वच्छ जल, मल-निकासी तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की आधुनिक परियोजनाएं क्रियान्वित होंगी ।
२. यातायात सुधार : सुसज्जित वाहन पार्किंग व्यवस्था, मार्ग संपर्क तथा सार्वजनिक परिवहन का सुदृढ़ीकरण ।
३. विरासत संरक्षण : आळंदी की आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण ।
४. जीवन स्तर में सुधार : स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य तथा जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार होगा ।
गुणवत्ता एवं अन्नसुरक्षा के विषय में ‘गोकुल’ संघ की ओर से कभी भी समझौता नहीं किया गया है ।
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