
चामराजनगर (कर्नाटक) – वर्तमान समय में संपूर्ण विश्व युद्ध की छाया में जी रहा है । ईरान, इजरायल एवं अमेरिका के मध्य का संघर्ष चरम पर पहुंच गया है । इस पृष्ठभूमि पर सुत्तुरू मठ के श्री शिवरात्रि देशीकेंद्र महास्वामीजी ने विश्वशांति के लिए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण संदेश दिया है । विश्व में शांति एवं सुख स्थापित करना हो, तो वह केवल आध्यात्मिक मार्ग से ही संभव है । क्रोध, द्वेष एवं शत्रुता से कभी भी शांति स्थापित नहीं हो सकती, ऐसा स्वामीजी ने कहा है । यहां के गुंडलुपेटे तहसील के सोमहळ्ळी मे आयोजित एक धार्मिक सभा में भक्तों को संबोधित करते हुए उन्होंने ऐसा प्रतिपादन किया ।
🌍 Global peace is possible only through the spiritual path!
“Peace and harmony cannot be established through anger, hatred, or war,” said Jagadguru Sri Shivarathri Deshikendra Mahaswamiji of Sri Suttur Kshetra (Karnataka).
🕉️ He emphasized that India’s true strength lies not… pic.twitter.com/rI1TJJ6uyz
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) March 6, 2026
परमाणु बम की अपेक्षा ‘आत्मबळ’ श्रेष्ठ !
भारत देश परमाणुबम के बल पर खडा नहीं है, अपितु यहां के लोगों के प्रचंड आत्मबल पर (आत्मस्थिरता के बल पर) खडा है । इसी कारण से विश्व के अन्य देशों की तुलना में आज भी भारत में शांति टिकी हुई है । वर्तमान में भारत ने आत्मबल पर ही विश्व को जीता है, ऐसा भी महास्वामीजी ने कहा ।
देश के मंदिरों के लिए एक स्वतंत्र ‘सनातन संरक्षण मंडल’ या समिति का गठन किया जाना चाहिए ! – Shankaracharya Sadanand Saraswati
जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज की प्रेरणा से छत्तीसगढ में १७५ लोगों ने हिन्दू धर्म में पुनर्प्रवेश किया ।
साधकों को स्वभावदोष एवं अहं के निर्मूलन की प्रक्रिया सिखाकर स्वसूचनाओं के द्वारा स्वभावदोषों पर विजय प्राप्त करने का मार्गदर्शन करनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी !
‘जहां जाऊं मैं, वहां गुरुदेवजी आप ही हैं !’
मंदिरों के प्रतिनिधियों एवं हिन्दुओं का संगठन आवश्यक ! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति
संतों के जन्मदिन पर ही भारत तथा बंगाल स्वतंत्र होने का एक दैवी संकेत ।