‘पूजाघर तथा उसमें देवताओं की रचना’ के संदर्भ में अध्यात्मशास्त्र

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवले

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी : पूजाघर में देवताओं की रचना करते समय क्या पूजाघर के ऊपर भी देवताओं के कुछ चित्र एवं मूर्तियां रखना उचित है ? तथा ऐसा रखने से उसका क्या परिणाम होता है ? क्या यह परिणाम देवता के अनुसार बदलता है ? कौन-से देवता की मूर्ति पर किस देवता की मूर्ति अथवा चित्र रख सकते हैं ? (३.२.२०२२)

श्री. राम होनप :

१. पूजाघर की संकल्पना

श्री. राम होनप

साधक के जीवन में सर्वाधिक महत्त्व देवताओं का होता है । उनकी कृपा से ही साधक की साधना एवं उसका जीवन सुचारू चलता रहता है । ऐसे देवताओं को नित्य जीवन में उचित एवं सम्मानजनक स्थान देना महत्त्वपूर्ण होता है । ‘देवताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना, साथ ही सहजता से उनकी पूजा-अर्चना करना संभव होना तथा उपासना के द्वारा उनकी कृपा प्राप्त करना’, इसके लिए पूजाघर की रचना का प्रयोजन है ।

२. पूजाघर का महत्त्व

पूजाघर में देवताओं की रचना करने के उपरांत उनकी ‘नियमित पूजा-अर्चना एवं उनका स्मरण करने’ के कारण पूजाघर में रखी देवताओं की मूर्तियों में विद्यमान देवत्व बढने लगता है । पूजाघर की विशिष्ट रचना के कारण पूजाघर में देवता का तत्त्व घनीभूत होता है । घर के प्रत्येक व्यक्ति एवं उस वास्तु को इसका आध्यात्मिक लाभ मिलता है । अतः वास्तु में स्थापित पूजाघर में देवताओं की मूर्तियां रखना महत्त्वपूर्ण है ।

३. पूजाघर के ऊपर देवताओं की मूर्तियां रखने से होनेवाली हानि

अ. साधक को साधना के आरंभ में उपासना करते समय पूजाघर में स्थित देवताओं की मूर्तियों पर मन एकाग्र करना सरल होता है । पूजाघर के ऊपर देवताओं की मूर्तियां रखने से ‘पूजाघर में स्थित देवताओं की मूर्तियों पर तथा पूजाघर के ऊपर रखी देवताओं की मूर्तियों’ पर मन एकाग्र करना कठिन हो जाता है ।

आ. साधक एवं ईश्वर में प्रेम का नाता होता है । साधकों का देवताओं के प्रति सख्यभाव एवं अपनापन होता है । साधक के मन में पूजाघर में स्थित देवताओं की मूर्तियों के विषय में ‘पूजाघर के देवी-देवताओं को धूप, ठंड एवं हवा से कोई कष्ट न हो’, यह भाव होता है । पूजाघर के ऊपर देवताओं की मूर्तियां रखने से साधक को ऐसा भाव रखने में कठिन होता है ।

इ. पूजाघर के ऊपर रखे जानेवाले देवता के चित्रों एवं मूर्तियों का उचित ध्यान न रखने से उनका अनादर होता है ।

४. पूजाघर के ऊपर देवताओं की मूर्तियां रखने से होनेवाले लाभ

पूजाघर में स्थित देवताओं की मूर्तियों में विद्यमान सगुण तत्त्व का तथा पूजाघर के ऊपर देवताओं की मूर्तियां रखने से उनमें विद्यमान सगुण-निर्गुण तत्त्व का साधक एवं उस वास्तु को आध्यात्मिक लाभ मिलता है ।

५. पूजाघर के ऊपर देवताओं की मूर्तियां किसे रखनी चाहिए तथा किसे नहीं रखनी चाहिए ?

सर्वसामान्य व्यक्ति एवं प्राथमिक चरण के साधक में सबसे पहले ‘पूजाघर में ईश्वर का वास है’, यह भाव वृद्धिंगत होना महत्त्वपूर्ण है । उसके कारण ऐसे लोग पूजाघर के ऊपर देवताओं की मूर्तियां न रखकर उन्हें पूजाघर में रखें । कालांतर से साधक में भाववृद्धि होने के उपरांत पूजाघर में तथा पूजाघर के ऊपर मूर्तियां रखने से उसे लाभ होता है ।

६. पूजाघर के ऊपर किन देवताओं की मूर्तियां अथवा चित्र रखना उचित है ?

पूजाघर के मध्य में श्री गणेश का चित्र अथवा मूर्ति होती है, वैसे ही पूजाघर के ऊपर मध्य में श्रीविष्णु की मूर्ति अथवा चित्र रखें । श्रीविष्णु का सृष्टि के पालन का कार्य अविरत जारी रहता है । श्रीविष्णु के द्वारा घर के लोगों के उचित ढंग से पालन-पोषण संबंधी अनेक सूक्ष्म तरंगें वातावरण में प्रक्षेपित होती रहती हैं । उनका आध्यात्मिक लाभ उस घर के परिजनों को होता है । पूजाघर के ऊपर ‘श्रीविष्णु की बाईं ओर पहले बालाजी, उसके पश्चात हनुमानजी एवं अंत में सुदर्शन चक्रधारी श्रीकृष्ण की मूर्ति अथवा चित्र होना चाहिए । श्रीविष्णु की दाहिनी ओर श्री दुर्गादेवी होनी चाहिए ।’ इस रचना के कारण पाताल की बडी अनिष्ट शक्तियों से उस घर के साधकों की रक्षा होने में सहायता मिलती है । बालाजी की मूर्ति के द्वारा ‘घर पर हुए तंत्र, मंत्र अथवा करनी’ के प्रभाव को रोकनेवाली सूक्ष्म तरंगें वातावरण में प्रक्षेपित होती रहती हैं ।’

– श्री. राम होनप (सूक्ष्म से प्राप्त ज्ञान), सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (ज्ञान प्राप्त होने का दिनांक २१.११.२०२५, समय सवेरे ११ बजे तथा कुल अवधि १५ सेकेंड)