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इंदौर (मध्य प्रदेश) – मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर की कमाल मौला मस्जिद के संदर्भ में २४ फरवरी के दिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने वैज्ञानिक प्रतिवेदन इंदौर उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया । इस प्रतिवेदन की प्रतिलिपियां वादी, प्रतिवादी तथा शासन को प्रदान की गई हैं; जिस पर आगामी २ सप्ताह में आपत्ति एवं विचार अंकित करने का आदेश न्यायालय ने दिया है । इस प्रतिवेदन में उल्लेखित है कि, कमाल मौला मस्जिद का निर्माण प्राचीन मंदिरों के अवशेषों, स्थापत्य घटकों, शिल्पों तथा शिलालेखों के खंडों का उपयोग करके किया गया है । वर्तमान संरचना कई शताब्दियों पश्चात, संतुलन एवं एकरूपता के अभाव में निर्मित की गई है ।
The ASI’s 2,100-page report to the Indore High Court reveals that the Kamal Maula Masjid at Bhojshala was built over a Hindu temple, says Advocate @Vishnu_Jain1
94 vigrahas including Shri Ganesh and Brahma and Sanskrit inscriptions were found during the survey.
If Bhojshala… pic.twitter.com/rMyv9krb4j
— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) February 24, 2026
१. २३ फरवरी को इस प्रकरण में इंदौर उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई । न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने संज्ञान लिया कि ९८ दिनों में पूर्ण किया गया २ सहस्त्र १०० पृष्ठों तथा १० खंडों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण प्रतिवेदन सीलबंद लिफाफे से पहले ही खोला जा चुका है एवं उसकी प्रतिलिपियां सभी पक्षों को वितरित कर दी गई हैं ।
२. न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है तथा यह स्पष्ट किया है कि वर्तमान में प्रचलित पूजा एवं नमाज की व्यवस्था में आगामी आदेश तक कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा । अगली सुनवाई १६ मार्च २०२६ को होगी, जिसमें प्रस्तुत की गई आपत्तियों एवं सुझावों पर विचार किया जाएगा ।
पहले से ही मंदिर शैली की वास्तुकला विद्यमान होने के साक्ष्य !प्रतिवेदन के अनुसार, पुरातत्व विभाग के दल ने कुल ९४ मूर्तियों एवं शिल्पों के अवशेष खोजे हैं, जिनमें भगवान श्री गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह, भैरव तथा विभिन्न पशुओं की आकृतियां सम्मिलित हैं । अनेक खंडों पर संस्कृत भाषा के शिलालेख प्राप्त हुए हैं, जिन्हें १२ वीं से १६ वीं शताब्दी का माना जा रहा है । इन निष्कर्षों से यह संकेत मिलता है कि यहां पहले मंदिर शैली की संरचना तथा कला विद्यमान थी । |
क्या है विवाद ?
भोजशाला विवाद कई वर्षों से धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से संवेदनशील विषय रहा है । हिन्दू समाज इस स्थल को ‘श्री वाग्देवी मंदिर’ मानकर पूजता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे ‘कमाल मौला मस्जिद’ कहता है । यह प्रकरण न्यायालय में जाने के पश्चात, न्यायालय के आदेश पर पुरातत्व विभाग ने यहां सर्वेक्षण किया एवं अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया ।
संपादकीय भूमिकाकेवल भोजशाला ही नहीं, अपितु भारत के अनेक हिन्दू मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों को ध्वस्त कर मुस्लिम आक्रांताओं ने वहां मस्जिदों का निर्माण किया । इसे संज्ञान में लेते हुए केंद्र सरकार को ऐसे समस्त स्थलों का सर्वेक्षण करवाकर सत्य को उद्घाटित करके उन स्थलों को हिन्दुओं को सौंपना आवश्यक हैं ! |
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