Tuljapur School : अनुचित बोधवाक्य के माध्यम से विद्यालय में विद्यार्थियों के मन में मंदिरों के प्रति घृणा उत्पन्न करने का प्रकार

तुळजापुर स्थित नगर परिषद प्राथमिक विद्यालय का प्रकार

अनुचित बोधवाक्य वाला यही वाक्य दीवार पर लिखा हुआ

तुळजापुर – यहां की नगर परिषद प्राथमिक शाला क्रमांक २ की दीवार पर ‘गांव में मंदिर न हो, तो भी चलेगा, परंतु एक आदर्श विद्यालय चाहिए’, ऐसा वाक्य लिखा हुआ पाया गया है । ‘मंदिर तथा विद्यालय दोनों समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं । मंदिर से संस्कार एवं आध्यात्मिक बल मिलता है, तो विद्यालय शिक्षा देता है । इसलिए इस प्रकार मंदिर का महत्व कम करने वाला, विद्यार्थियों में मंदिर के प्रति घृणा उत्पन्न करने वाला संदेश देना उचित नहीं है । प्रशासन को इस वाक्य की ओर ध्यान देकर इसे बदलना चाहिए और ‘गांव में आदर्श विद्यालय तथा मंदिर दोनों आवश्यक हैं, ऐसा संदेश देना अपेक्षित है’, ऐसा लोगों का कहना है ।

संपादकीय भूमिका 

समाज पर विद्यालय का महत्व अंकित करने के लिए प्रशासन तथा विद्यालय प्रबंधन को केवल हिंदुओं का मंदिर ही दिखाई दिया क्या ? इसके पीछे किसी साम्यवादी की मानसिकता है, यह हिंदुओं को समझना चाहिए ।