असदुद्दीन ओवैसी का संतापजनक वक्तव्य !

भाग्यनगर (तेलंगाना) – टीपू सुल्तान वर्ष १७९९ में ‘शहीद’ हुए । उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध लडते हुए बलिदान दिया । टीपू ने कारागार में बैठकर आपके वीर सावरकर की भांति अंग्रेजों को ६-६ प्रेमपत्र लिखकर ‘आप जो कहेंगे, वह करूंगा’ ऐसा कहकर क्षमा नहीं मांगी । टीपू सुल्तान तलवार हाथ में लेकर देश को अंग्रेजों से मुक्त कराने के लिए लडे एवं शहीद हुए, ऐसा बयान ए.आई.एम.आई.एम. (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यहां एक कार्यक्रम में दिया । मालेगांव नगर पालिका के एक कक्ष में टीपू का चित्र लगाए जाने के प्रकरण को लेकर उन्होंने यह बयान दिया ।
सांसद ओवैसी ने आगे कहा कि,
ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने अपनी पुस्तक ‘विंग्स ऑफ फायर’ में लिखा है कि ‘आज भारत के पास जो मिसाइल और रॉकेट तकनीक है, वह टीपू के सपनों की पूर्ति है ।’ क्या यह झूठ है ? साथ ही महात्मा गांधी ने अपने ‘यंग एज’ नामक पत्र में लिखा था कि ‘टीपू सुल्तान हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक हैं ।’ (महात्मा गांधी की ऐसी ही मानसिकता के कारण आगे चलकर भारत का विभाजन हुआ, यह ओवैसी क्यों नहीं बताते ? टीपू ने एक ही दिन में १ लाख हिन्दुओं का धर्मांतरण कराया था, यह इतिहास ओवैसी क्यों नहीं बताते ? – संपादक)
इसी प्रकार वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति कपूर आयोग ने महात्मा गांधी हत्या प्रकरण में वीर सावरकर को षड्यंत्र में सम्मिलित बताया था । (न्यायालय ने इस प्रकरण में सावरकर को निर्दोष मुक्त किया था, यही इतिहास है ! – संपादक)
संपादकीय भूमिका
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