आज के बच्चे कल के आदर्श भारत के शिल्पकार हैं ! पश्चिम का अंधानुकरण, ‘टी.वी.’ का अतिरेक, ‘मोबाइल’ का दुरुपयोग आदि के कारण नैतिक मूल्य भूल चुकी एवं दिशाहीन हो रही आज की पीढी को सुसंस्कारी एवं आदर्श बनाने का सरल एवं उत्तम मार्ग है, सनातन की ग्रन्थमाला ‘बालसंस्कार’ !
गुण बढाकर आदर्श बनें !
संकलनकर्ता : सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले एवं पू. संदीप गजानन आळशी
१. गुण-संवर्धन प्रक्रिया क्या है ?
२. बच्चों में गुण होने की आवश्यकता क्या है ?
३. गुण-संवर्धन सारणी क्यों एवं कैसे लिखें ?
४. स्वावलंबन, नम्रता इ. गुण आत्मसात कैसे करें ?
हमारे अन्य प्रकाशन१. स्वभावदोष दूर कर आनन्दी बनें ! २. अध्ययन कैसे करें ? ३. राष्ट्र एवं धर्म प्रेमी बनो ! ४. टी.वी., मोबाइल एवं इंटरनेट की हानि से बचें और लाभ उठाएं ! |
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