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नई दिल्ली – केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा घोषित नई नियमावली के अनुसार अब सरकारी कार्यक्रमों, सरकारी विद्यालयों के समारोहों तथा अन्य औपचारिक कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम्’ राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य होगा । ३ मिनट १० सेकंड के इस राष्ट्रगीत के सम्मान में सभी को खडा रहना होगा । इस गीत के संपूर्ण ६ अंतरे गाए जाएंगे एवं उनमें श्री दुर्गादेवी का उल्लेख भी रहेगा । इससे पहले केवल २ अंतरे गाए जाते थे, जिनमें लगभग ६५ सेकंड का समय लगता था । ७ नवंबर २०२५ को ‘वन्दे मातरम्’ को १५० वर्ष पूर्ण हुए । इस अवसर पर केंद्र सरकार द्वारा देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए थे । उसी के अंतर्गत नई नियमावली घोषित की गई है ।
A Historic Move for the National Song! 🇮🇳
The MHA has announced that singing 'Vande Mataram' is now mandatory across India
As we celebrate 150 years of this iconic anthem, here are the key updates:
⏱️ The Protocol: Citizens must stand for 3 mins 10 seconds. All 6 stanzas to… pic.twitter.com/ArMGzjoPtz— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) February 11, 2026
ध्वजारोहण, राष्ट्रपति एवं राज्यपालों के कार्यक्रम, उनके भाषण तथा राष्ट्र को संबोधन से पहले राष्ट्रगीत गाया जाएगा । विशेष रूप से यदि राष्ट्रगान (जन गण मन) एवं राष्ट्रगीत (वन्दे मातरम्) दोनों बजाए जाने हों, तो पहले ‘वन्दे मातरम्’ और उसके उपरांत ‘जन गण मन’ गाया जाएगा । सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और संवैधानिक संस्थाओं को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं ।

सिनेमा घरों में ‘वन्दे मातरम्’ अनिवार्य नहीं
२८ जनवरी को केंद्र सरकार ने इस संबंध में नियमावली जारी की है । १० पृष्ठों के निर्देश में किन-किन कार्यक्रमों में ‘वन्दे मातरम्’ अनिवार्य होगा, इसकी सूची दी गई है । इसमें सिनेमा घरों को सम्मिलित नहीं किया गया है ।
संसद के शीतकालीन सत्र में ‘वन्दे मातरम्’ पर हुई थी चर्चा
‘वन्दे मातरम्’ राष्ट्रगीत को १५० वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर वर्ष २०२५ के अंत में आयोजित संसद के शीतकालीन सत्र में इस विषय पर चर्चा की गई थी । उस समय बंगाल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों के संदर्भ में केंद्र सरकार ने जानबूझकर राष्ट्रगीत का मुद्दा आगे बढाया, ऐसा आरोप कांग्रेस ने लगाया था । (हर बात को राजनीति के दृष्टिकोण से देखने वाली कांग्रेस ! – संपादक)

(और इनकी सुनिए…) ‘वन्दे मातरम्’ को अनिवार्य करने के प्रयास हिन्दुत्व के प्रचार के लिए !’ – असदुद्दीन ओवैसी
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ राष्ट्रगीत है, परंतु संविधान में इसे गाने को अनिवार्य करने वाला कोई कानून नहीं है । ‘वन्दे मातरम्’ को अनिवार्य करने के प्रयास हिन्दुत्व के प्रचार के लिए हैं और यह धर्मनिरपेक्षता को आघात पहुंचाने वाला है । मुसलमान केवल अल्लाह की उपासना करते हैं और धर्म के आधार पर राष्ट्रीय भावना को मापना अनुचित है । हिन्दुत्व के नाम पर ‘वन्दे मातरम्’ को बलपूर्वक जोडा जा रहा है, जो संविधान के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है ।
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(और इनकी सुनिए…) ‘धार्मिक या सांस्कृतिक दबाव बनाना अनुचित है !’ – अखिलेश यादव, सांसद, समाजवादी पार्टी
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि संविधान ने नागरिकों को गायन की स्वतंत्रता दी है तथा कोई सुने अथवा न सुने, यह उनका व्यक्तिगत मत है । ‘वन्दे मातरम्’ को बलपूर्वक जोडने से धार्मिक अथवा सांस्कृतिक दबाव उत्पन्न होता है, जो समावेशी राष्ट्रीय भावना के अनुरूप नहीं है ।
इससे पहले समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने भी ‘वन्दे मातरम्’ सुनने या गाने का विरोध व्यक्त किया था । उनका कहना था कि मुसलमानों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए एवं ‘वन्दे मातरम्’ को अनिवार्य करने का विचार उचित नहीं है ।

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