‘ऐसा कहा जाता है कि इस विश्व में एकमात्र ऐसे देवता हैं, जिन्होंने पृथ्वी पर अपना वास बनाए रखा है; क्योंकि पृथ्वी अर्थात माता दुर्गा का निवासस्थान ! अपनी पत्नी से प्रेम के कारण भगवान शिव इस पृथ्वी पर वास करते हैं ।
पृथ्वी पर लिंग के रूप में भगवान महादेव की पूजा-अर्चना की जाती है; क्योंकि उन्हें वैसा श्राप दिया गया था । इस श्राप का परिणाम है महादेव का ‘शिवलिंग’, जिसे ‘पिंडी’ भी कहते हैं । शिवलिंग महादेव के लिंग का तथा सृष्टि की योनि का प्रतीक है । इसी शिवलिंग से पुन:-पुन: सृष्टि की रचना होती रहती है । शिवलिंग की पूजा प्रकृति एवं ईश्वर की पूजा है । इसी से मनुष्य का कल्याण साधा जाता है ।
विभिन्न शिवलिंगों की जानकारी तथा उनके पूजन की पद्धतियां

१. काली शिला से बना शिवलिंग : ‘काली शिला’ से बना शिवलिंग सर्वाधिक प्रचलित है ! यह शिवलिंग मुख्यरूप से शिवमंदिर में दिखाई देता है । इस शिवलिंग का महत्त्व यह है कि जिस व्यक्ति पर शनि का कोप अधिक हो, वह इस शिवलिंग का पूजन करे । विवाह न होना, निरंतर दुर्घटनाएं होना, नवजात बच्चों का जीवित न रहना, नींद न आना, शत्रु पर विजय प्राप्त करने के लिए, कोई बडा कार्य पूर्ण करने के लिए, भूतबाधा दूर करने के लिए, साथ ही बुरे सपने न आएं इसके लिए काली शिला से बने शिवलिंग की पूजा-अर्चना उचित है । सामान्यतः काली शिला से बना शिवलिंग स्वयंभू होता है । इसे इच्छापूर्ति शिवलिंग कहते हैं । यह शिवलिंग पितृदोष, नारायण नागबलि एवं कालसर्प जैसे महादोष दूर करने के लिए उचित है; परंतु ऐसे शिवलिंग को घर में रखना अनुचित है । उसे घर में रखने से अकस्मात मृत्यु, मनुष्य का मानसिक संतुलन बिगड जाना, बच्चों का माता-पिता से दूर हो जाना, बार-बार दुर्घटनाओं में मृत्यु होना इत्यादि संकटों का सामना करना पडता है । इस शिवलिंग की उचित पद्धति से पूजा-अर्चना होना आवश्यक है । इस शिवलिंग का उपयोग मुख्यरूप से मनुष्य के महादोष नष्ट करने के लिए किया जाता है ।

२. संगमरमर का (श्वेत) शिवलिंग : समाज में श्वेत शिवलिंग का भी बहुत प्रचलन है । अनेक श्रद्धालुओं में यह भ्रम होता है कि शिवलिंग को यदि घर में रखना हो, तो उसके लिए किसी भी प्रकार का शिवलिंग चलता है । श्वेत शिवलिंग रखने का उद्देश्य है हमारे जीवन में आनेवाली अनिष्ट (बुरी) घटनाओं अथवा संकटों को दूर करना ! जीवन में अपनी इच्छाओं की पूर्ति हेतु ब्रह्माजी से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हम अपने घर में श्वेत शिवलिंग रखकर उसकी पूजा-अर्चना कर सकते हैं ।

३. चांदी का शिवलिंग : अनेक श्रद्धालुओं में चांदी के शिवलिंग का प्रचलन है । इस शिवलिंग में अधिकतर एक बडा दोष दिखाई देता है, इस शिवलिंग का खोखला होना ! शिवलिंग चाहे कोई भी हो, वह खोखला नहीं होना चाहिए । वह किसी भी स्थिति में उपयोगी नहीं होता । चांदी का शिवलिंग हमारे मन की दुर्बल मानसिकता अथवा बीमारी दूर करने के लिए उपयुक्त है । इस शिवलिंग के लिए एक कठोर नियम यह है कि उसे सदैव चमकीला एवं ओजस्वी बनाए रखना होता है । चांदी काली पड जाने से उसे अशुभ संकेत मानें । उसके लिए उसके उचित अनुष्ठान होना भी आवश्यक है ।

४. पीतल का शिवलिंग : सबसे अधिक उपयोग में लाया जानेवाला शिवलिंग है पीतल से बना शिवलिंग ! पीतल का शिवलिंग भगवान शिवजी के अवतार अर्थात भैरव देवता के नेतृत्व का दर्शक है । घर में इस शिवलिंग की स्थापना करने का अर्थ है, अपने घर में अपने कुलदेवता अथवा कुलदेवी की स्थापना करना ! जैसे हम अपने घर में कुलदेवता के टाक (देव-प्रतीक) की स्थापना करते हैं, यह पीतल का शिवलिंग भी उसी उच्च योग्यता एवं आध्यात्मिक महत्त्व का है । यह शिवलिंग घर में एकता बनाए रखने का कार्य करता है । अपने कुलदेवता का स्मरण कर उचित मंत्रोच्चारण के साथ इस शिवलिंग की पूजा-अर्चना करने से उचित फल प्राप्त हो सकता है ।

५. स्फटिक शिवलिंग : वर्तमान समय में सबसे अधिक उपयोग में लाया जानेवाला शिवलिंग है ‘स्फटिक शिवलिंग !’ इस शिवलिंग का महत्त्व एवं महिमा भिन्न-भिन्न है । यह एक पारदर्शी पत्थर अथवा रत्न है । इस शिवलिंग का लाक्षणिक महत्त्व यह है कि अनिष्ट शक्तियों का नाश करने के लिए मुख्य रूप से इस शिवलिंग का उपयोग किया जाता है । ग्रहों का, विशेषकर राहू एवं केतु का अनिष्ट प्रभाव नष्ट करने के लिए इस शिवलिंग का उपयोग किया जाता है । अनिष्ट शक्तियों का कष्ट हो, तो उस दृष्टि से यह शिवलिंग उपयुक्त सिद्ध हो सकता है । यदि इस शिवलिंग का स्थान चूक गया, तो उससे हमारे घर में बहुत क्लेश अथवा विवाद होते हैं । घर में उचित दिशा में इस शिवलिंग की स्थापना कर उस पर उचित मंत्रोच्चारण एवं पूजा-अर्चना करने से, स्फटिक शिवलिंग बहुत सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करेगा तथा वह अधिक मात्रा में लाभकारी सिद्ध होगा ।

६. पारद शिवलिंग : पारद शिवलिंग श्रद्धालुओं में अल्प प्रचलित है; परंतु सत्य यह है कि पारद शिवलिंग उपरोक्त सभी शिवलिंगों में सबसे अधिक लाभकारी एवं फलदायी शिवलिंग है । उचित पद्धति से इस शिवलिंग की स्थापना करने तथा पूजापाठ करने से हमें निश्चित ही फल की प्राप्ति होती है । इस पृथ्वी पर भक्तों को देवी लक्ष्मी, प्रकृति एवं भगवान शिव के द्वारा आशीर्वाद प्राप्त हों; इसलिए इस पृथ्वी पर यह शिवलिंग प्रकट हुआ है । इस शिवलिंग में पारद अर्थात बुध ग्रह का अस्तित्व व्याप्त है । विशेष बात यह है कि यह शिवलिंग इतना फलदायी क्यों है ? क्योंकि पारद का अर्थ है भगवान शिव का वीर्य ! जिसके कारण वह संपूर्ण फल प्राप्त कराता है । यह शिवलिंग उत्पत्ति का प्रतीक है ।’
(साभार : मासिक ‘स्वामी संकेत’)

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(और इनकी सुनिए…) ‘कुंकुम इस्लामी देशों से आता है, तो क्या फिर हिन्दु तिलक लगाना बंद कर देंगे ?’ – Priyank Kharge
आंध्रप्रदेश – उपद्रवी व्यक्ति ने शिवलिंग के सामने के दीप से सिगरेट जलाई।