तमिलनाडु की द्रमुक सरकार ने केरल कुंभमेला रथयात्रा की अनुमति को किया अस्वीकार

चेन्नई (तमिलनाडु) – केरल के मलप्पुरम में आयोजित कुंभमेला – महामाघा महोत्सव से संबंधित रथयात्रा को तमिलनाडु सरकार ने अनुमति देने से मना कर दिया है । यह रथयात्रा उदुमलपेट के निकट थिरुमूर्ति पहाडियों से प्रारंभ होने वाली थी । यहां से भरतपुझा नदी का उद्गम होता है ।

१. आयोजकों ने बताया कि, उदुमलपेट की पुलिस ने रथयात्रा रोक दी और कहा कि, चेन्नई के उच्च सरकारी अधिकारियों ने अनुमति अस्वीकार कर दी है ।

२. आयोजकों ने रथयात्रा की श्री महामेरु मूर्ति को चार पहिया वाहन से केरल सीमा तक ले जाने का निर्णय लिया और तत्पश्चात रथयात्रा को पलक्कड (केरल) से पुनः प्रारंभ किया गया । यह रथयात्रा भरतपुझा नदी के तट पर थिरुनावया में चल रहे महोत्सव से संबंधित है ।

३. आयोजकों ने पूर्व में कहा था कि, महामेरु प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली यह रथयात्रा महोत्सव के एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक चरण को दर्शाएगी । यह यात्रा भरतपुझा नदी के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक संबंध तथा तमिलनाडु एवं केरल राज्यों की संस्कृति की ऐतिहासिक कडी के रूप में महत्वपूर्ण है । इसमें तमिलनाडु के प्रमुख ‘आधीनम्’ तथा धार्मिक संस्थाओं का सम्मिलित होना अपेक्षित था ।

४. यह रथयात्रा भारतीय धर्मप्रचार सभा के आचार्य डॉ. श्रीनाथ करायट्ट के नेतृत्व में तथा विभिन्न साधु परंपराओं के वरिष्ठ आचार्यों के साथ मार्गक्रमण कर रही है । यात्रा २१ जनवरी के दिन थिरुनावया में समाप्त होगी, जहां महोत्सव के अगले भाग के रूप में महामाघा पूजा संपन्न होगी ।

५. ‘महामाघा महोत्सव २०२६’ का आधिकारिक उद्घाटन केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने १९ जनवरी को किया तथा उन्होंने महोत्सव हेतु विधिपूर्वक ध्वजारोहण किया ।

संपादकीय भूमिका 

सनातन धर्म को नष्ट करने का कथन करने वाली द्रमुक सरकार ने यदि ऐसी कृति की है, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं है । इस वृत्ति को राजनीतिक रूप से समूल नष्ट करने हेतु हिन्दुओं को संगठित होकर प्रयास करने चाहिए !