Shaksgam Valley Dispute : (और इनकी सुनिए…) ‘जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी हमारी है !’ – चीन का दावा

चीन बना रहा है पाकिस्तान तक सडक !

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग

बीजिंग (चीन) – भारत के जम्मू-कश्मीर स्थित शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) के क्षेत्र पर चीन ने अपना दावा ठोकते हुए उसे अपना भाग बताया है । चीन के विदेश मंत्रालय ने यह वक्तव्य दिया है । इस घाटी से होकर चीन पाकिस्तान तक पहुंचने के लिए ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ (CPEC) का निर्माण कर रहा है । उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान ने वर्ष १९४८ में शक्सगाम घाटी पर अवैध नियंत्रण प्राप्त किया था तथा वर्ष १९६३ में यह क्षेत्र अवैध रूप से चीन को सौंप दिया था ।

(और इनकी सुनिए…) ‘अपने क्षेत्र में आधारभूत ढांचा निर्माण करना हमारा अधिकार !’

चीन सरकार के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ के अनुसार, चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि जिस क्षेत्र के बारे में प्रश्न उठाए जा रहे हैं, वह चीन का ही भाग है । अपने क्षेत्र में आधारभूत ढांचा (Infrastructure) विकसित करना चीन का संप्रभु अधिकार है एवं इस पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जा सकता । उन्होंने आगे कहा कि चीन तथा पाकिस्तान ने १९६० के दशक में सीमा समझौता किया था एवं दोनों देशों के बीच सीमा निश्चित की गई थी । यह निर्णय दो संप्रभु देशों ने अपने अधिकारों के अनुसार लिया था ।

‘महामार्ग का कश्मीर सूत्र पर चीन की भूमिका से कोई संबंध नहीं !’

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के विषय में माओ निंग ने कहा कि, यह एक आर्थिक सहयोग परियोजना है, जिसका उद्देश्य स्थानीय, आर्थिक एवं सामाजिक विकास को बढावा देना तथा लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना है ।चीन-पाक सीमा समझौते तथा इस महामार्ग का कश्मीर सूत्र पर चीन की पुरानी भूमिका से कोई संबंध नहीं है । कश्मीर इतिहास से जुडा एक जटिल प्रश्न है, जिसे भारत एवं पाकिस्तान को सीधे आपस में चर्चा करके शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहिए । चीन संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों एवं अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सम्मान करता है ।

हम इस परियोजना को मान्यता नहीं देते ! – भारत

विदेश मंत्रालय की ९ जनवरी को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा था कि शक्सगाम घाटी भारत का अभिन्न भाग है । हमने वर्ष १९६३ में हुए तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है । हम उस समझौते को अवैध मानते हैं, क्योंकि वह भारत के उस भूभाग से संबंधित है जो पाकिस्तान के अवैध नियंत्रण में है । जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख भारत के अविभाज्य अंग हैं । यह बात पाकिस्तान एवं चीन दोनों को कई बार स्पष्ट रूप से बता दी गई है ।

संपादकीय भूमिका 

  • चीन की मानसिकता को देखते हुए यदि कल वह पूरे कश्मीर को ही अपना हिस्सा होने का दावा करे, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए !
  • भारत को इस क्षेत्र में बन रही सडक का निर्माण रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई करने का साहस दिखाना आवश्यक है !