PM Modi Somnath Temple : सोमनाथ का इतिहास पराजय का नहीं, अपितु पुनर्निर्माण का है ! – प्रधानमंत्री मोदीजी

प्रधानमंत्री मोदीजी

सोमनाथ (गुजरात) – एक सहस्र (हजार) वर्ष पूर्व आक्रमणकारियों को लगता था कि वे जीत गए हैं । गजनी को लगा कि उसने सोमनाथ का विनाश कर दिया है ।तथापि, उसके शीघ्र बाद मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया । उसके पश्चात खिलजी ने मंदिर को गिराया । परंतु जूनागढ के राजाओं ने मंदिर को फिर से बनवाया । आज भी सोमनाथ मंदिर पर फहराता ध्वज भारत की शक्ति एवं क्षमता को प्रकट करता है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां मार्गदर्शन करते हुए कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश एवं पराजय का नहीं, अपितु विकास एवं पुनर्निर्माण का है । प्रधानमंत्री मोदीजी १० जनवरी की शाम को सोमनाथ पहुंचे । वर्ष १०२६ में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के १ सहस्र वर्ष पूरे होने के अवसर पर यहां ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जा रहा है । ११ जनवरी की सुबह प्रधानमंत्री मोदी ने शंख सर्कल पर ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व भी किया । उसके पश्चात उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना की । इसके उपरांत उन्होंने यहां आयोजित सभा को संबोधित किया ।

मोदीजी द्वारा रखे गए मुख्य बिंदु

फूट डालने वाली शक्तियों से सावधान रहना चाहिए !

आज भी हमें सतर्क एवं एकजुट रहना चाहिए । हमें अपने बीच फूट डालने वाली शक्तियों से सावधान रहना चाहिए । आज प्रत्येक नागरिक को विकसित भारत पर विश्वास है । भारत अपने स्वाभिमान को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा । हम निर्धनता के विरुद्ध अपनी लडाई जीतेंगे ।

देश की कुछ शक्तियों द्वारा मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध !

जिस देश के पास विरासत होती है, उसे उस पर गर्व होता है । तथापि, हमारे देश की स्वतंत्रता के उपरांत पराधीनता की (दस्यु) मानसिकता के लोग उस विरासत को भूल गए । जब सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रतिज्ञा की, तब उन्हें रोकने के प्रयास किए गए । तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भी मंदिर जाने से रोका गया ।

सोमनाथ या भारत, दोनों नष्ट नहीं हुए !

यह संयोग है कि आज सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण को १ सहस्र वर्ष पूरे हुए हैं एवं अब इसके पुनर्निर्माण को ७५ वर्ष बीत चुके हैं । सोमनाथ को नष्ट करने के एक नहीं, अपितु असंख्य प्रयास हुए । विदेशी आक्रमणकारियों ने सदियों तक भारत को नष्ट करने का प्रयास किया; परंतु न तो सोमनाथ नष्ट हुआ एवं न ही भारत । आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं, तो मेरे मन में यह प्रश्न आता है कि आप जहां बैठे हैं, वहां १ सहस्र वर्ष पहले वातावरण कैसा रहा होगा ? हमारे पूर्वजों ने अपनी श्रद्धा के लिए अपने प्राण संकट में डाले ।

सोमनाथ की गाथा का शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता !

ओंकार की ध्वनि एवं मंत्रों का जाप ७२ घंटों तक चलता रहा । सोमनाथ की १ सहस्र वर्ष पुरानी गाथा एवं शौर्य यात्रा का वर्णन मंत्रमुग्ध कर देने वाला है । इस अनुभव को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता । यह समय अद्भुत है, यह वातावरण अद्भुत है तथा यह उत्सव भी अद्भुत है । एक ओर स्वयं देवाधिदेव महादेव हैं तो दूसरी ओर समुद्र की लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की गूंज एवं श्रद्धा की लहर है । इस दिव्य वातावरण में आप सभी भक्तों की उपस्थिति इस क्षण को दिव्य तथा भव्य बना रही है । सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में मुझे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में सेवा करने का अवसर मिला, यह मैं अपना बडा सौभाग्य मानता हूं ।