प्रेमभाव का मूर्त स्वरूप तथा मिरज आश्रम के आधारस्तंभ रहे सनातन के ५१वें संत पूज्य जयराम जोशी आजोबा का देहत्याग ।

पूज्य जयराम जोशी

मिरज (जिला सांगली), १० दिसम्बर (वार्ता) – प्रेमभाव के मूर्त स्वरूप, साधकों के प्रति वात्सल्यभाव रखने वाले तथा भावभक्ति के बल पर मिरज आश्रम के मुख्य आधार बने सनातन के ५१वें समष्‍टि-संत पूज्य जयराम जोशी आजोबा (पू. आबा) (वय ८८ वर्ष) ने ९ दिसम्बर २०२५ को रात्रि ९ बजकर २५ मिनट पर सनातन के मिरज आश्रम में देहत्याग किया । उनका अंतिम संस्कार मिरज स्थित वैकुण्ठभूमि में १० दिसम्बर को प्रातः ११ बजे किया गया । उनके पार्थिव शरीर पर अग्निसंस्कार से पूर्व सनातन की सद्गुरु स्वाती खाडये ने दर्शन लेकर उन्हें पुष्पहार अर्पित किया ।

पूज्य जोशी आजोबा के पश्चात उनका परिवार

उनके २ भ्राता श्री मनोहर जोशी, श्री मधुकर जोशी, ३ भावजायें श्रीमती उषा जोशी, श्रीमती मंजिरी जोशी तथा श्रीमती सुनीता जोशी, पुत्र श्री योगेश जोशी, पुत्रवधू सौ. भाग्यश्री जोशी, पौत्री कु. ऐश्वर्या जोशी, पुत्री श्रीमती आरती म्हैसकर,दामाद श्री प्रसाद म्हैसकर, पौत्र श्री दर्शन म्हैसकर, श्री दर्शन की पत्नी श्रीमती अनुश्री म्हैसकर तथा प्रपौत्र कु. अर्णव म्हैसकर है ।

पूज्य जोशी आजोबा ७३ वर्ष की आयु में आश्रम में रहने के लिए आये तथा अल्प समय में ही आश्रम-जीवन में पूर्णतः समरस हो गये । प्रेमभाव को तत्त्वनिष्ठता से संयोजित करने वाले पू. आजोबा ने मिरज आश्रम के साधकों को साधना में मार्गदर्शन व सहयोग देकर वहां के साधकों का मुख्य आधार का स्थान प्राप्त किया । कितनी भी शारीरिक व्यथा हो, फिर भी प्रसन्न बने रहना – यह उनका विशेष गुण था । प्रकृति अनुकूल न होने पर भी अधिक समय सेवा करने की उनकी अत्यंत लगन रहती थी ।

क्षणचित्र

१. देहत्याग के उपरांत भी पू. जोशी आजोबा की कांति पीतवर्ण दिखाई दे रही थी । उस पर पूर्ववत् तेज विद्यमान था ।
२. उनके पार्थिव शरीर को अग्निसंस्कार हेतु ले जाते समय उनका मुखमंडल किसी ऋषि-मुनि के सदृश प्रतीत हो रहा था ।