‘वन्दे मातरम्’ को १०० वर्ष हुए, तब देश ने आपातकाल का काला अध्याय अनुभव किया ! – PM Modi

‘वन्दे मातरम्’ के १५० वर्ष पूरे होने पर लोकसभा में चर्चा के समय प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर की तीखी टिप्पणी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में यह वक्तव्य दिया कि, जब ‘वन्दे मातरम्’ को ५० वर्ष पूरे हुए, तब हमारा देश पराधीनता में जी रहा था । देश में पराधीनता थी । जब ‘वन्दे मातरम्’ को १०० वर्ष पूरे हुए, तब देश आपातकाल का काला अध्याय अनुभव कर रहा था । उस समय भारतीय लोकतंत्र का गला घोंटने का काम किया गया । देशभक्तों को जेलों में डाल दिया गया था । दुर्भाग्य से, हमने उस समय एक काला कालखंड अनुभव किया था । प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ वही गीत है, जिसने वर्ष १९४७ में हमें स्वतंत्रता दिलाई । ‘वन्दे मातरम्’ को १५० वर्ष पूरे होने के निमित्त ८ दिसंबर को लोकसभा में हुई चर्चा के समय मोदी ने ‘वन्दे मातरम्’ की प्रशंसा करते हुए कांग्रेस पर आलोचना की ।

नेहरू ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए !

प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए आगे कहा कि,

मोहम्मद अली जिन्ना ने १५ अक्टूबर १९३७ को लक्ष्मणपुरी (लखनऊ) से ‘वन्दे मातरम्’ के विरोध में घोषणा दी थी । कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष नेहरू को अपना सिंहासन डगमगाता हुआ दिखा । नेहरू ने मुस्लिम लीग के निराधार बयानों का करारा जवाब देने या उनका निषेध करने की अपेक्षा, उल्टा किया । उन्होंने ‘वन्दे मातरम्’ की जांच आरंभ कर दी । नेहरू ने ५ दिनों के उपरांत नेताजी बोस को पत्र लिखा । उसमें उन्होंने जिन्ना की भावनाओं से सहमति जताते हुए लिखा कि, ‘वन्दे मातरम्’ के ‘आनंदमठ’ वाले संदर्भ के कारण मुसलमान आहत हो सकते हैं । मुसलमान भडक सकते हैं ।’ इसके पश्चात कांग्रेस का वक्तव्य आया कि २६ अक्टूबर को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक होगी, जिसमें ‘वन्दे मातरम्’ के उपयोग पर पुनरावलोकन किया जाएगा । इस प्रस्ताव के विरोध में लोगों ने देशभर में प्रभात फेरियां निकालीं; परंतु कांग्रेस ने ‘वन्दे मातरम्’ का विरोध करना जारी रखा । इतिहास साक्षी है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए । दुर्भाग्य से, कांग्रेस की नीतियां आज भी वैसी ही हैं ।