महोत्सव की सफल संपन्नता हेतु श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी ने की प्रार्थना

पळणी (तमिलनाडू) – सप्तर्षि जीवनाडीपट्टिका में किए गए उल्लेख के अनुसार श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी ने तमिलनाडू के दिंडुगल जिले के पळणी स्थित श्री कार्तिकेय देवता के दर्शन कर उनके चरणों में देहली में होनवाले ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’का निमंत्रणपत्र अर्पण किया, साथ ही ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’में आनेवाली बाधाएं दूर होने हेतु प्रार्थना की ।
पळणी की एक पहाडी पर स्थित इस मंदिर में श्री कार्तिकेय देवता का जागृत स्थान है । सनातन संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी की एक आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी ने राजआभूषण धारण किए हुए श्री कार्तिकेय देवता के दर्शन कर उनके चरणों में फल एवं पुष्प अर्पण किए । उसके साथ ही ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ की तैयारियां तथा प्रत्यक्ष महोत्सव निर्विघ्नरूप से संपन्न होने हेतु, साथ ही हिन्दू राष्ट्र की शीघ्रातिशीघ्र स्थापना होने हेतु प्रार्थना की ।
पळणी स्थित श्री कार्तिकस्वामी जागृत मंदिर तथा वहां स्थित ‘नवपाषाण मूर्ति’तमिलनाडू के पळणी में श्री कार्तिकस्वामी का जागृत मंदिर है । यहां श्री कार्तिकस्वामी को ‘दंडायुधपाणी’के नाम से जाना जाता है । देवताओं के सेनाधिपति युवा रूप में स्थित श्री कार्तिकस्वामी यहां हाथ में दंड धारण कर खडे हैंह । इस मूर्ति को ‘नवपाषाण मूर्ति’ कहा जाता है । ‘नव’ अर्थात ‘९’ एवं ‘पाषाण’ अर्थात ‘विष’ ! ९ प्रकार की विषैली आयुर्वेदीय मूलिकाओं का उपयोग कर ‘भोग’ नामक ऋषि ने यह मूर्ति बनाई है । उसके कारण इस मूर्ति को ‘नवपाषाण मूर्ति’ कहा जाता है । ये ९ प्रकार की विषैली आयुर्वेदीय मूलिकाएं शरिर को होनेवाली सभी प्रकार की विषबाधा दूर करनेवाली मूलिकाएं हैं । |
श्री कार्तिकस्वामी की राजआभूषणों से युक्त पूजा

पळणी के मंदिर में स्थित श्री कार्तिकेयजी को प्रतिदिन सायंकाल ६ बजे ‘राजआभूषण’ पहनाए जाते हैं । इसमें श्री कार्तिकेय को एक कुर्ता, कमर में लाल रंग के वस्त्र का पट्टा एवं धोती, साथ ही मस्तक पर तुर्रे से युक्त राजमुकुट पहनाया जाता है ।
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