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मुंबई, २९ नवम्बर (वार्ता) – वर्ष २०१६ में पुणे में संपन्न ‘सनबर्न उत्सव’ का मुद्रांक शुल्क (stamp duty) राज्य शासन के राजस्व विभाग (revenue department) ने पूरे ७ वर्ष में अभी तक प्राप्त ही नहीं किया है । इस शुल्क को निरस्त कराने के लिए आयोजकों ने मुंबई उच्च न्यायालय में वर्ष २०१८ तथा २०१९ में दो जनहित याचिकाएं प्रविष्ट की थीं । इन दोनों याचिकाओं को मुंबई उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया । इसके पश्चात् राजस्व विभाग द्वारा मुद्रांक शुल्क वसूल किया जाना अपेक्षित था । ‘सनबर्न उत्सव’ के आयोजकों ने शासन का ४२ लाख ९२ सहस्र ८५ रुपये मुद्रांक शुल्क जमा नहीं किया, जिसके कारण अब तक ६९ लाख ५३ सहस्र १२१ रुपये दंडराशि के रूप में निर्धारित की गयी है । मुद्रांक शुल्क तथा उस पर लगा दंड — ऐसी कुल १ करोड १२ लाख ४५ सहस्र २०६ रुपये की राशि प्राप्त किए बिना ही करचोर ‘सनबर्न उत्सव’ को मुंबई में पुनः अनुमति प्रदान कर दी गयी है । ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि श्री प्रीतम नाचनकर द्वारा राजस्व विभाग से मांगी गई जानकारी से यह गंभीर प्रकरण उजागर हुआ ।
इसके अतिरिक्त इसी उत्सव पर ६० लाख ५५ सहस्र ३८३ रुपये गौण खनिज उत्खनन शुल्क तहसीलदार ने लगाया था । वर्ष २०१७ में तत्कालीन राजस्वमंत्री ने विधानसभामें यह आश्वासन दिया था कि यह शुल्क प्राप्त के लिए प्रयास किया जाएगा । वर्ष २०१९ में इस शुल्क को निरस्त कराने हेतु आयोजक प्रान्ताधिकारी के पास गए । प्रान्ताधिकारी ने मात्र ३ दिन में निर्णय देकर शुल्क निरस्त कर दिया; किन्तु प्रशासन उसके विरोध में सत्र न्यायालय में नहीं गया ।
पुणे में वर्ष २०१६ के ‘सनबर्न उत्सव’ हेतु तहसील कार्यालय ने ४२ लाख ९२ सहस्र ८५ रुपये मुद्रांक शुल्क लगाया था । ‘यह शुल्क निरस्त किया जाए’— इस हेतु आयोजकों ने मुंबई उच्च न्यायालय में याचिका प्रविष्ट की । मुंबई उच्च न्यायालय ने वर्ष २०१८ तथा २०१९ के निर्णय में आयोजकों से यह शुल्क प्राप्त करने का आदेश दिया; परंतु इस निर्णय के पश्चात् भी राजस्व विभाग ने आज तक यह शुल्क प्राप्त नहीं किया । न्यायालय के आदेश के बाद प्रति माह २ प्रतिशत दंडदर से दंडराशि ६९ लाख ५३ सहस्र १२१ रुपये तक पहुंच गयी है । दंडराशि लाखों में पहुंच जाने पर भी राजस्व विभाग ने अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है ।
गोवा शासन की भांति महाराष्ट्र शासन भी असहाय !
वर्ष २००९, २०१४ तथा २०२० में ‘सनबर्न उत्सव’ के आयोजकों ने गोवा राज्य का ६ करोड २९ लाख रुपये कर नहीं चुकाया । इस विषय में सितम्बर २०२५ में मुंबई उच्च न्यायालय ने ‘सनबर्न उत्सव’ की १ करोड १० लाख रुपये सुरक्षा जमा राशि जप्त करने का आदेश दिया । गोवा की भांति महाराष्ट्र शासन का कर भी डुबोकर सनबर्न के आयोजकों ने न्यायालय के निर्णय की अवहेलना की है; परंतु इसके उपरांत भी मुंबई में १९ से २१ दिसम्बर २०२५ तक होनेवाले ‘सनबर्न उत्सव’ को राज्य शासन के विभिन्न विभागों ने अनुमति प्रदान कर दी है । (सनबर्न फेस्टिवल को अनुमति देनेवाले विभाग तथा राज्य के राजस्वमंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना आवश्यक है — ऐसा सामान्य जनता का मत है । – संपादक)
(और इनकी सुनिये…) ‘शुल्क की सख्ती से प्राप्त करेंगे !’ – मुद्रांक शुल्क कार्यालय (Stamp Duty Office)अब तक शुल्क क्यों नहीं प्राप्त किया गया ? इसका उत्तर पहले जनसामान्य को मिलना चाहिए ! – संपादक राज्य शासन के पंजीयन महानिरीक्षक (Inspector General of Registration ) तथा मुद्रांक नियंत्रक (Exchange Controller) कार्यालय ने ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि श्री प्रीतम नाचनकर द्वारा भेजे गये पत्र के उत्तर में लिखा — परंतु वास्तविकता यह है कि न्यायालय के निर्णय को ७ वर्ष हो चुके हैं, फिर भी वसूली आज तक नहीं की गयी है । (इतने वर्षों तक वसूली नहीं की — अब करेंगे, इसकी क्या निश्चितता ? – संपादक) |
‘सनबर्न उत्सव’ की विवादास्पद पृष्ठभूमि१. वर्ष २००९ में नेहा बहुगुणा (आयु २३ वर्ष), तथा वर्ष २०१४ में इशा मंत्री (आयु २७ वर्ष) की मृत्यु हुई ।
३. वर्ष २०२४ में करण कश्यप (आयु २६ वर्ष) की अमली पदार्थों के अति-सेवन से मृत्यु होने का आरोप है । ४. वर्ष २०१३ में अमली पदार्थ विरोधी पथक ने उत्सव में ‘ड्रग डीलर’ सौरभ अग्रवाल को पकडा । उस समय एक सहस्र से अधिक व्यसनी युवकों पर पुलिस ने दंड लगाया । ५. वर्ष २०१३ में उत्सव से दो दिन पूर्व गोवा में ‘रेप ड्रग’ कहलानेवाली ‘केटामीन’ की ४५० शीशियां पकडी गयीं । आरोप था कि इन्हें इसी कार्यक्रम में वितरित किया जाना था । |
संपादकीय भूमिका
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