Neuro-Weapon Threat : विज्ञान में तीव्र प्रगति के कारण मानव-मस्तिष्क भविष्य में युद्ध का नवीन क्षेत्र बन सकता है ।

यूनाइटेड किंगडम्‌ स्थित ब्रैडफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के विख्यात अनुसंधानकर्ताओं का मत

मायकल क्रॉउली आणि मॅल्कम डँडो

लंदन (यूनाइटेड किंगडम्‌) – ब्रैडफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के माइकल क्रौली एवं मल्कम डैन्डो इन विख्यात अनुसंधानकर्ताओं ने कठोर शब्दों में चेतावनी दी है कि विज्ञान की तीव्र उन्नति के फलस्वरूप भविष्य में मानव-मस्तिष्क युद्ध का नवीन रणक्षेत्र बन सकता है । उनका स्पष्ट मत है कि यदि विश्व ने अभी ही इस विषय में कठोर उपाय नहीं किए, तो आने वाले काल में युद्ध बन्दूकों से नहीं, अपितु सीधे मस्तिष्क को लक्ष्य करनेवाली नवीन प्रौद्योगिकी से लडे जाएंगे ।

१. क्राऊली तथा डैन्डो ये दोनों विशेषज्ञ इसी सप्ताह नीदरलैण्ड्स के हेग नगर में ‘रासायनिक अस्त्र’ विषय पर होनेवाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सम्मिलित होने वाले हैं ।

२. इस सम्मेलन में वे विश्व को अवगत कराएंगे कि मानव-मस्तिष्क को प्रभावित करनेवाली प्रौद्योगिकी इतनी तीव्रता से विकसित हो रही है कि यदि इसे समय रहते रोका न गया, तो महान्‌ विपत्तियां उत्पन्न हो सकती हैं ।

३. क्राऊली के अनुसार यह बात केवल कल्पना-सी प्रतीत होती है, किन्तु संकट पूर्णतया वास्तविक है ।

४. इन दोनों विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में युद्ध अस्त्रों से नहीं, अपितु सीधे मानव-मस्तिष्क पर लडे जाएंगे, जहां शत्रु एक भी गोली चलाए बिना आपकी विचार-शक्ति, स्मृति, ग्राह्य-शक्ति तथा निर्णय-ग्रहण-क्षमता को अपनी आवश्यकतानुसार परिवर्तित कर सकेगा । यह सुनने में किसी चलचित्र के कथानक जैसा प्रतीत होता है; किन्तु ऐसा भविष्य अब अधिक दूर नहीं है ।